आज भी इलाज के अभाव में जा रही कई जाने

 सरकार के दावे पड़ रहे फीके 

 

 

निकिता मालवीय की कलम से

भोपाल मध्य प्रदेश में 20 सालों से भाजपा की सरकार है और बीजेपी सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन यह दावे केवल कागजों में ही है मध्य प्रदेश के पिपरिया जिले में अस्पताल ऑक्सीजन और कंपाउंडर की कमी होने के कारण... ऐसे सज्जन व्यक्ति की मृत्यु हो गई जिसने हजारों लोगों को सही मार्गदर्शन देकर जीवन को जीना सिखाया... जी हाँ हम सब के बीच स्वर्गवासी दिनेश मालवीय जी की 48 घंटे पहले

 हम सबके बीच रास्ते मुस्कुराते नजर आ रहे थे... मेरे पापा जी, उम्र 63 वर्ष, एक जिम्मेदार, सजग और आत्मनिर्भर व्यक्ति थे... दिन शनिवार दिनांक 5 जुलाई दोपहर करीब 2 बजे, जब वो अकेले घर पर थे....उन्हें अचानक सीने में तेज़ दर्द और सांस लेने में तकलीफ़ महसूस हुई... कोई पास में नहीं था लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.... फोन उठाकर अपने दोस्तों को कॉल किया...

उनके दोस्त तुरंत पहुँचे और स्थिति की गंभीरता को समझकर जल्दी से अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया...

 लेकिन पिपरिया जैसे छोटे शहर में कोई भी ऐसा अस्पताल नहीं था जहाँ हार्ट अटैक का इमरजेंसी इलाज किया जा सके...डॉक्टरों ने सुझाव दिया कि उन्हें भोपाल ले जाया जाए करीब 150 किलोमीटर दूर...

यह सुनते ही हर कोई हरकत में आ गया,1) कोई ऑक्सीजन सिलेंडर खोजने भागा,

2)कोई एम्बुलेंस और एक कंपाउंडर की व्यवस्था में लग गया,3)और किसी ने भोपाल के अस्पतालों से बात शुरू की..

लेकिन हर तैयारी में समय लग रहा था। पिपरिया में संसाधन सीमित थे... और समय बहुत कीमती था... इस आपाधापी में करीब 4 घंटे निकल गए। पापा जी की हालत धीरे-धीरे बिगड़ती गई...ऑक्सीजन की कमी, प्राथमिक चिकित्सा की अनुपलब्धता और समय का अभाव — ये तीनों उनकी हालत पर भारी पड़ गए...अंततः करीब शाम 6 बजे, जब एम्बुलेंस तैयार हुई और उन्हें ले जाने की कोशिश हुई… हम उन्हें खो चुके थे...यह उन हजारों लोगों की कहानी है जो भारत के छोटे शहरों और कस्बों में बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में अपनी जान गंवा देते हैं... समय पर सही इलाज न मिल पाना एक मौन त्रासदी बन चुका है... सरकार कब जागे गी और ऐसे निर्दोष लोग जो इलाज के अभाव में अपनी जान गवा देते हैं उनके लिए सोचेगी