यूनाइटेड फोरम के बैनर तले हजारों नियमित एवं संविदा अधिकारी एवं कर्मचारियों ने अपनी मांगों के संबंध में सरकार का ध्यानाकर्षण
*यूनाइटेड फोरम के बैनर तले हजारों नियमित एवं संविदा अधिकारी एवं कर्मचारियों ने अपनी मांगों के संबंध में सरकार का ध्यानाकर्षण कराया।*
सौरभ नाथ की खबर 9039502565
*संविदा कर्मियों को बगैर परीक्षा सीधे नियमितीकरण एवं गृह जिला ट्रांसफर नीति मुख्य मांग*
*मुख्यमंत्री महोदय के नाम का ज्ञापन प्रशासन की ओर से आए जहांगीराबाद थाना प्रभारी को सोपा गया*
भोपाल हेडलाइन यूनाइटेड फोरम वर्षों से विद्युत कर्मियों की जायज मांगों के संबंध में पत्राचार के माध्यम से कंपनी प्रबंधन प्रशासन एवं शासन को अवगत कराता आ रहा है किंतु पूर्णता जायज और नियमबद्ध मांगो को शासन प्रशासन नजरअंदाज कर रहा है। फोरम ने कई पत्रों के माध्यम से पर अपर प्रमुख सचिव ऊर्जा से विभिन्न बिंदुओं के संबंध में चर्चा हेतु समय मांगा किंतु जो दिन रात आंधी तूफान बारिश में अपनी जान का जोखिम लेकर सबके घरों में प्रकाश विद्यमान करता है ऐसे विद्युत कर्मियों की जायज मांगों हेतु चर्चा के लिए संबंधितों के पास समय नहीं है बड़ी-बड़ी योजनाओं पर काम चल रहा है किंतु बाद जब विद्युत कर्मियों की वेतन विसंगतियों की आती है तो कंपनियों के पास फंड खत्म हो जाता है जब आप अपने ही लोगों की वेदना समझ नहीं पाते तब मजबूरन हमें सड़कों पर उतरना होता है।
*यूनाइटेड फोरम से इंजी. व्ही के एस परिहार* ने बताया की वर्तमान में ऊर्जा मंत्री के प्रयासों से नवीन ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर जारी हुआ है जिसके लिए हम उनका अभिवादन करते हैं किंतु विद्युत विभाग में जो संविदा कर्मी लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार के माध्यम से पूर्ण प्रक्रियाओं का पालन करते हुए भरते हुए थे जिन्हें कार्य करते हुए 8 से 10 वर्ष से अधिक समय का अनुभव है उन्हें अब रिक्त पदों के विरुद्ध सीधे नियमित किया जाना न्याय उचित होगा एक पद हेतु दो बार एग्जाम लेने की क्या आवश्यकता है जब आपके द्वारा ही एक बार संपूर्ण प्रक्रिया का पालन किया गया है तो अब ऐसे अनुभवी कोमियो को सीधे नियमित करना ही उचित होगा।
*यूनाइटेड फोरम के कार्य अध्यक्ष आर एस कुशवाह* ने बताया की विद्युत विभाग में विभिन्न वर्गों में वेतन की विसंगतियां व्याप्त है ARO, कंपनी कैडर के नियमित कार्यालय सहायक एवं परीक्षण सहायक संविदा आदि की वेतन में वर्षों से विसंगति चली आ रही है जिसका निराकरण कंपनी स्तर पर किया जा सकता है किंतु छोटी-छोटी समस्याओं को समय रहते निराकरण न करने के कारण हमें मजबूर होकर धरातल पर उतरकर ध्यान आकर्षण जैसे कार्य कार्यक्रमों की आवश्यकता पड़ती है।
*यूनाइटेड फोरम के प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेंद्र श्रीवास्तव* का कहना है की फोरम निरंतर पत्रों के माध्यम से अपनी समस्याओं को शासन प्रशासन तक उठता आया है किंतु जब तक विद्युत कर्मी सड़कों पर नहीं उतरता तब तक हमारी मांगों के प्रति विभाग उदासीन बना रहता है, विद्युत विभाग का काम राज्य सरकार के अन्य विभागो के समान नहीं है और ना ही सभी को एक ही तराजू में तौला जा सकता है विद्युत विभाग आंधी तूफान बारिश में भीषण गर्मी पर जब लोग चैन से घर में बैठते हैं उन विपरीत परिस्थितियों का सामना करके एक बिजली कर्मी खंबे पर अपनी जान का जोखिम लेकर काम करता है हमारे सैकड़ो विद्युत कर्मी कार्य करते हुए शहीद हो गए किंतु ना ही उन शहीदों की तरफ सरकार का ध्यान गया और ना ही स्वयं के बीजेपी जन संकल्प 2013 बिंदु क्रमांक 6 जिसमें उन्होंने विद्युत संविदा कर्मियों को सीधे नियमित करने का लिखित वादा किया था जिसे सरकार बनने के बाद कभी देखा तक नहीं गया, सरकार से यही निवेदन है की नवीन ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर में वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मियों को सीधे नियमित किया जाए और शेष पदों के विरुद्ध भर्ती आरंभ की जावे अन्यथा की स्थिति में अब विद्युत कर्मियों के आंदोलन से सड़के आबाद रहेंगी।
*प्रदेश संगठन सचिव दुर्गेश दुबे* ने कहा की वर्षों से हजारो विद्युत कर्मी अपने बुजुर्ग माता-पिता से दूर कार्य कर रहे हैं उन्हें ना ही नियमित किया जा रहा और ना ही कंपनी टू कंपनी ट्रांसफर नीति बनाकर उनके गृह कंपनी भेजा जा रहा है।
जहां एक और आंशिक वेतन के कारण वह अपने बुजुर्ग माता-पिता की आवश्यकता पूरी करने में समर्थ नहीं है तो वहीं दूसरी ओर सैकड़ो किलोमीटर दूर होने के कारण किसी भी विपरीत परिस्थिति में अपने माता-पिता तक समय रहते नहीं पहुंच पाते इसलिए शासन प्रशासन को चाहिए की विद्युत विभाग में एक ऐसी नीति का सृजन किया जाए जिससे सभी वर्गों के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के विद्युत कर्मचारी अपने गृह कंपनी ट्रांसफर होकर अपने घरों के आसपास विद्युत विभाग की सेवा एवं अपने परिवार का भरण पोषण कर पाए।
विद्युत कर्मियों की 9 सूत्रीय मांगे :-
1.संविदा कर्मचारियों को सीधे
नियमित किया जाए।
2. बिजली कंपनियों में गृह जिला ट्रांसफर (कंपनी टू कंपनी) नीति बनाई जाए।
3. संविदा नीति 2023 में महंगाई
भत्ता DA, इंक्रीमेंट जोड़ा जाए।
4. राजस्व सहायक अधिकारी एवं कार्यालय सहायक को उच्च शिक्षा प्राप्त समकक्ष पद पर तकनीकी पद दिया जाए, प्रथम हायर स्केल दिया जाए।
5. मध्य क्षेत्र में संविदा परीक्षण सहायक की वेतन विसंगति दूर की जाए।
6. संविदा नीति 2023 में पूर्व से निर्धारित 50% आरक्षण भर्तियों में दिया जाए।
7. राष्ट्रीय अवकाश एवं उत्सव अवकाश में संविदा कर्मियों को काम करने पर दोगुना मानदेय दिया जाए।
8. नियमित कर्मियों के समान नियम अनुसार 9,18,35 वर्ष पूर्ण करने पर उच्च वेतनमान एवं प्रमोशन दिया जाए।
9. शासकीय सेवा में संविदा से सीधी भर्ती होने पर 3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि 70,80,90 नियमावली को समाप्त किया जाए।
पूरे प्रदेश से लगभग 500 अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे, इसमें मुख्य रूप से श्री वीकेएस परिहार, श्री आर.एस.कुशवाह, श्री जाहिद खान, श्री आर.एन.एस.ठाकुर, श्री बी.बी.एस.परिहार, श्री जे.एल.तेजराज, श्री दुर्गेश दुबे, श्री विवेक विश्वकर्मा, श्री सुर्दशन सोलंकी, श्री मुकेश वर्मा, श्री अजय कुमार, इंदौर से धर्मेंद्र मालवीय, दारा सिंह चंदेल, प्रदीप द्विवेदी, सूरज सिंह, प्रकाश सिंह, कमलेश साहू, चंद्र प्रकाश ठाकुर, विवेक विश्वकर्मा, मनजीत सिंह जबलपुर से पूर्व क्षेत्र कंपनी संयोजक एसके पचौरी, अरुण ठाकुर, राजकुमार पंथी, चंद्रशेखर पटेल, अजय नामदेव, अरुण मालवीय, इंद्रपाल सिंह, नारायण त्यागी, विकास मिश्रा, संजय रघुवंशी, कपिल यादव, राजीव रंजन, हुकम यादव, गणेश कडू, सुबोध एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे ।
