संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग भोपाल को युवाओं ने पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से सौंप ज्ञापन
संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग भोपाल को युवाओं ने पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से सौंप ज्ञापन
सौरभ नाथ की खबर 9039502565
भोपाल न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के बावजूद डिप्लोमा धारकों को सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी पद पर नियुक्ति न दिए जाने को लेकर ज्ञापन सौंपा मध्यप्रदेश पशुपालन विभाग द्वारा डिप्लोमा धारक अभ्यर्थियों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है, जबकि माननीय उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ द्वारा स्पष्ट और अंतिम आदेश पारित किए जा चुके हैं।मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:1. डिप्लोमा पाठ्यक्रम मान्यता:दिनांक 06 फरवरी 2012 को माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी एवं पशुपालन मंत्री श्री अजय विश्नोई जी द्वारा 'नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा संस्थान, जबलपुर विश्वविद्यालय" के अंतर्गत 5 डिप्लोमा कॉलेजों की स्थापना की गई थी। प्रत्येक कॉलेज में 60 सीटें थीं, कुल 300 सीटें।
2. आज तक डिप्लोमा उत्तीर्ण छात्र वर्ष 2012 से अब तक लगभग 5500 छात्र डिप्लोमा उत्तीर्ण कर चुके हैं। इस कोर्स को करने वाले छात्र ज़्यादातर ग्रामीण और मध्य वर्गीय परिवार से आते है। चूंकि डिप्लोमा होल्डर्स का पंजीकरण शासन द्वारा नहीं किया जाता इसलिए डिप्लोमा होल्डर्स अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस भी नहीं कर सकते, ऐसे में डिप्लोमा होल्डर्स के पास कैरियर विकल्प बहुत सीमित है। सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी पद एक मात्र पद है जिसके द्वारा डिप्लोमा होल्डर्स शासकीय सेवा में आ सकते हैं। 3. न्यायालयीन आदेशों का क्रमः याचिका क्रमांक 19468/2019 उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में दायर की गई। दिनांक 3/12/2020 को उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश देते हुए, सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी पद पर डिग्री धारी की नियुक्ति याचिका क्रमांक 19468/2019 के अंतिम फैसले के अधीन रखा गया।
याचिका क्रमांक 19468/2019 उच्च न्यायालय इंदौर खंडपीठ द्वारा दिनांक 10.03.2025 को सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी पद पर डिप्लोमा धारकों को नियुक्ति देने का आदेश दिया गया। उक्त आदेश के खिलाफ डिग्रीधारियों द्वारा डबल बेंच में याचिका क्रमांक 1642/2025 दाखिल की गई जिसे माननीय न्यायालय द्वारा 16.05.2025 को खारिज कर दिया गया।
पशुपालन विभाग द्वारा पुनः डबल बेंच में याचिका क्रमांक 1727/2025 दाखिल कि गई, इस अपील को भी 03.07.2025 को खारिज कर दिया गया और याचिका क्रमांक 19468/2025 में दिनांक 10/3/2025 को पारित आदेश को मान्य किया गया।
4. विभागीय मनमानीः
उपरोक्त सभी न्यायिक आदेशों के बावजूद विभाग अभी तक न तो नई चयन सूची निकाल रहा है और न ही डिप्लोमा धारकों को उनका न्यायोचित हक दे रहा है, साथ ही उन डिग्री धारी की नियुक्ति निरस्त नहीं कर रहा है, जिनकी नियुक्ति माननीय न्यायालय के अंतिम आदेश के अधीन थी। विभाग अपनी मनमानी से न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर रहा है, जो न केवल निंदनीय है, बल्कि कानून का उल्लंघन भी है।
5. वित्तीय पहलू
एक डिप्लोमा छात्र के प्रशिक्षण पर सरकार द्वारा 2 वर्षों में आरएस2,40,000 की राशि व्यय की जाती है। इसके बाद भी यदि उन्हें नियुक्ति नहीं दी जाती, तो यह सरकार के संसाधनों की अनुचित बर्बादी और छात्रों के साथ अन्याय है।
हमारी मांगे
1. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश 19468/2019 (दिनांक 10.03.2025) को शीघ्र लागू किया जाए।
2. डिप्लोमा धारकों की नियुक्ति सूची शीघ्र जारी की जाए।
3. जिन डिग्री धारी की नियुक्ति माननीय न्यायालय के अंतिम आदेश के अधीन थी, उनकी नियुक्ति निरस्त कर, उनकी जगह डिप्लोमा धारको की नियुक्ति की जाए।
4. विभागीय अधिकारियों द्वारा न्यायालय के आदेशों की उपेक्षा करने की जवाबदेही तय की जाए।
5. भविष्य में सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी पदो पर नियुक्ति भर्ती नियम और माननीय न्यायालय के आदेश के अनुरूप डिप्लोमा धारकों को ही दी जाए।
