ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले उठी ईडब्लूएस और आरक्षण विसंगतियों को दूर करने की मांग
ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले उठी ईडब्लूएस और आरक्षण विसंगतियों को दूर करने की मांग
ब्राह्मण और करणी संगठनों ने की समस्त वर्गों के लिए समान मापदंड की वकालत
भोपाल हेडलाइंस संतोष योगी की खबर
भोपाल, 7 सितंबर 2025 — परशुराम सेवा संगठन मध्यप्रदेश और श्री राजपूत करणी सेना ने संयुक्त रूप से पत्रकार वार्ता आयोजित कर ओबीसी आरक्षण मामले में न्यायालयीन प्रक्रिया के बीच ईडब्लूएस और अन्य आरक्षण मापदंडों की असमानताओं को समाप्त करने की मांग की है।
संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक सभी वर्गों के लिए समानता और पारदर्शिता नहीं लाई जाती, तब तक ओबीसी आरक्षण को 14% से 27% करने का निर्णय टाल दिया जाना चाहिए।
परशुराम सेवा संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुनील पाण्डेय, करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह दिखित और प्रवक्ता किरण सिंह रोठौड़ ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा 4 मई 2022 को लगाई गई रोक हटाने हेतु सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस पर अगली सुनवाई 23 सितंबर 2025 से प्रतिदिन होगी।
वक्ताओं ने कहा: आरक्षण का बोझ एक वर्ग पर क्यों?
पत्रकार वार्ता में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रदेश में आरक्षण की स्थिति निम्नानुसार है:
SC – 16%
ST – 20%
OBC – 14%
EWS (सवर्ण वर्ग) – 10%
अनारक्षित (General) – 40% (जिसमें भी SC/ST/OBC को मौका मिलता है)
वक्ताओं ने तर्क दिया कि अनारक्षित वर्ग की रिक्तियों में SC/ST/OBC वर्ग को अवसर प्राप्त होता है, जबकि उनके कोटे की रिक्तियों में सामान्य वर्ग को अवसर नहीं दिया जाता। इस प्रकार सवर्ण वर्ग को प्रभावी रूप से सिर्फ 10% आरक्षण मिलता है, वह भी अनेक मापदंडों और जटिलताओं से भरा हुआ है।
"गरीब-गरीब होता है, जाति नहीं देखता" — वक्ताओं की एक स्वर में मांग
वक्ताओं ने कहा कि सरकार गरीबी को जातिगत आधार पर नहीं, बल्कि समान आर्थिक मापदंडों पर परिभाषित करे। यदि किसी भी वर्ग के गरीब को आरक्षण का लाभ मिलना है, तो सभी गरीबों को समान रूप से लाभ मिलना चाहिए।
राजनीतिक लाभ के लिए आरक्षण का दुरुपयोग
वक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही राजनीतिक दल ओबीसी आरक्षण का श्रेय लेने की होड़ में लगे हैं, जबकि सवर्ण, एससी और एसटी वर्गों की आवश्यकताओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक वोट बैंक को प्रभावित करने का प्रयास मात्र है, न कि सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने की पहल।
उपस्थित प्रमुख सदस्य:
इस अवसर पर परशुराम सेवा संगठन एवं करणी सेना के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
शिवकुमार शुक्ला, ओमप्रकाश मिश्रा, ज्ञान त्रिपाठी, सुरेन्द्र कुमार शर्मा, अजय (महासचिव), ब्रिजेश द्विवेदी (कोषाध्यक्ष), विजेश शास्त्री, अवधेश प्रसाद तिवारी (पूर्व सांसद प्रतिनिधि), पंकज दुबे, और ओम दिवान।
