क्षत्रिय करणी सेना ने उठाई समाज, किसान, युवाओं और धर्म-संस्कृति की रक्षा की मांग
क्षत्रिय करणी सेना ने उठाई समाज, किसान, युवाओं और धर्म-संस्कृति की रक्षा की मांग
*भोपाल हेडलाइंस*
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भोपाल। पत्रकार वार्ता में क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत, मध्यप्रदेश अध्यक्ष इंदल सिंह राणा और प्रदेश उपाध्यक्ष आशु सिंह ने सरकार के समक्ष 10 सूत्रीय प्रमुख मांगों को रखते हुए स्पष्ट किया कि समाज के सम्मान, युवाओं के भविष्य, किसानों की समस्याओं, धर्म-संस्कृति की रक्षा तथा देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे वीर जवानों के हित में अब ठोस कदम उठाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी उद्देश्य को लेकर समस्त क्षत्रिय समाज द्वारा आगामी दिनों में भोपाल में "क्षत्रिय क्रांति महासम्मेलन" का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देशभर के क्षत्रिय संगठनों एवं समाज के प्रबुद्धजनों को सादर आमंत्रित किया गया है। डॉ. शेखावत ने कहा कि यह सम्मेलन केवल समाज की बात नहीं करेगा, बल्कि देश और धर्म की रक्षा की दिशा में ठोस रणनीति तय करेगा। इस महासम्मेलन में महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष संगीता सिंह, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं मध्यप्रदेश प्रभारी राहुल सिंह राजपूत तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र (डेवल) सिंह राणा की प्रमुख भूमिका रहेगी। संगठन ने यह स्पष्ट किया है कि अब केवल ज्ञापन नहीं, बल्कि आंदोलन की नीति पर समाज चलेगा और सरकार को इन मुद्दों पर जवाब देना होगा।
भोपाल में क्षत्रिय क्रांति महासम्मेलन, 10 सूत्रीय मांगें हुईं घोषित
प्रेस वार्ता में संगठन द्वारा जिन 10 सूत्रीय मांगों की घोषणा की गई, वे इस प्रकार हैं: (1) हरदा प्रकरण में दोषी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। (2) आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण को 10% से बढ़ाकर 20% किया जाए तथा प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को सरल और ऑनलाइन किया जाए। (3) अग्निवीर योजना को समाप्त कर पूर्ववत स्थायी सेना भर्ती प्रणाली बहाल की जाए, जिसमें सभी सुविधाएं पूर्व की तरह दी जाएं। (4) गौ माता को "राष्ट्र माता" का दर्जा दिया जाए, गौ रक्षा हेतु कठोर कानून बनाए जाएं और गौशालाओं में व्यापक सुधार हो। (5) राजनीतिक भागीदारी में क्षत्रिय समाज को उसकी जनसंख्या के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। (6) किसानों के हित में सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा दिया जाए और फसल नुकसान पर समय पर मुआवजा दिया जाए। (7) देश के इतिहास एवं संस्कृति की रक्षा की जाए, महापुरुषों के अपमान को रोका जाए तथा भोजशाला रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। (8) आरक्षण की समीक्षा की जाए और इसका आधार केवल आर्थिक स्थिति हो ताकि लाभ वास्तविक जरूरतमंदों को मिले। (9) एट्रोसिटी एक्ट में सुधार करते हुए उसके दुरुपयोग पर रोक लगाई जाए और गिरफ्तारी केवल दोष सिद्ध होने पर ही की जाए। (10) मठ-मंदिरों की जमीन मंदिरों के नाम दर्ज की जाए तथा अवैध कब्जों को तत्काल हटाया जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि ये मांगें केवल क्षत्रिय समाज की नहीं, बल्कि राष्ट्र, धर्म, किसान, जवान और युवाओं के भविष्य से जुड़ी हुई हैं और यदि सरकार ने समय रहते इन पर विचार नहीं किया, तो समाज सड़कों पर उतरने से भी पीछे नहीं हटेगा।
