"ब्लड प्रेशर: वह ख़ामोश दुश्मन जो बिना आहट के जान ले सकता है" "डॉ. ज़ीशान अहमद की चेतावनी: बीपी को हल्के में लिया तो हार्ट अटैक दे देगा जवाब" ब्लड प्रेशर – साइलेंट किलर: डॉ. ज़ीशान अहमद की बेबाक बातचीत
"ब्लड प्रेशर: वह ख़ामोश दुश्मन जो बिना आहट के जान ले सकता है"
"डॉ. ज़ीशान अहमद की चेतावनी: बीपी को हल्के में लिया तो हार्ट अटैक दे देगा जवाब"
ब्लड प्रेशर – साइलेंट किलर: डॉ. ज़ीशान अहमद की बेबाक बातचीत भोपाल हेडलाइंस के संपादक संतोष योगी से सीधी चर्चा डा जीशान अहमद की
भोपाल हेडलाइंस संतोष योगी की खबर
भोपाल, 09 सितम्बर 2025 –
ब्लड प्रेशर यानी हाई बीपी को “साइलेंट किलर” कहा जाता है, और इसके पीछे कारण बेहद चौंकाने वाले हैं। प्रसिद्ध चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. ज़ीशान अहमद का कहना है कि यह बीमारी चुपचाप शरीर के अंदर ऐसा तांडव मचाती है, जिसका पता तब चलता है जब स्ट्रोक, हार्ट अटैक या किडनी फेल्योर जैसी जानलेवा स्थितियां सामने आ जाती हैं।
बीपी सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि बीमारियों की फैक्ट्री है। यह स्ट्रोक, हार्ट अटैक, किडनी फेल्योर और आंखों की रोशनी तक छीन सकता है। दुखद यह है कि आज यह बीमारी युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है – वजह है तनाव, जंक फूड, नींद की कमी और व्यायाम की अनदेखी।
डॉ. ज़ीशान कहते हैं, “आज का युवा मोबाइल और कॉफी के सहारे जागता है, जंक फूड खाता है, और नींद को नज़रअंदाज़ करता है। यही नई पीढ़ी हाई बीपी की चपेट में आ रही है।”
उन्हें चिंता इस बात की है कि कई बार बीपी के कोई लक्षण ही नहीं होते, इसलिए लोग नियमित जांच को टालते रहते हैं।
क्या करें आम लोग?
डॉ. ज़ीशान अहमद की सलाह साफ है:
30 की उम्र के बाद हर हफ्ते बीपी जांच कराएं।
नमक कम खाएं, तनाव से दूर रहें।
रोज़ाना 30 मिनट पैदल चलें और नींद पूरी लें।
और हाँ – दवा से डरें नहीं, दवा ज़रूरी हो तो ज़रूर लें।
एक केस का ज़िक्र करते हुए डॉ. ज़ीशान बताते हैं, “एक 35 वर्षीय फिट युवक को बार-बार सिरदर्द होता था, लेकिन उसने बीपी कभी चेक नहीं कराया। ऑफिस में स्ट्रोक हुआ। जब तक संभलते, काफी नुकसान हो चुका था।”
युवाओं के लिए संदेश:
“ब्लड प्रेशर को बड़ों की बीमारी मानना अब पुराना सोच है। 25 से 40 की उम्र वाले सबसे ज्यादा खतरे में हैं। इसलिए बीपी को नजरअंदाज करना अपनी ही जिंदगी से खिलवाड़ करना है।
निष्कर्ष
ब्लड प्रेशर कोई छोटी बीमारी नहीं है। यह वह ख़ामोश हत्यारा है जो आपकी जीवनरेखा को धीरे-धीरे काटता है। सजग रहिए, नियमित जांच कराइए और स्वस्थ जीवनशैली अपनाइए – यही इसका सबसे बड़ा इलाज है।
