दलित पिछड़ा समाज संगठन DPSS के तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम प्रदेशभर में हुई आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप दतिया जिला सहित प्रदेश भर में सैकड़ों करोड़ का हुआ भ्रष्टाचार- दामोदर यादव
दलित पिछड़ा समाज संगठन
प्रदेशभर में हुई आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप दतिया जिला सहित प्रदेश भर में सैकड़ों करोड़ का हुआ भ्रष्टाचार- दामोदर यादव
भोपाल हेडलाइंस संतोष योगी की खबर
महिला बाल विकास विभाग म.प्र. द्वारा संपूर्ण प्रदेश में की गई आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया में सैकड़ों करोड़ का भ्रष्टाचार होने का अनुमान है। मेरे ग्रह जिला दतिया के तीनों विकास खंड में कुल 270 पद थे जिनकी भर्ती प्रक्रिया को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाते हुए संबंधित अधिकारियों ने प्रदेश सरकार का मज़ाक बना दिया है जिसके प्रमाण प्रादेशिक मीडिया के समक्ष रख रहा हूँ। उक्त बात दलित पिछड़ा ममाज संगठन DPSS के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं आज़ाद समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता दामोदर सिंह यादव ने भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में कही।
यादव ने कहा की दतिया जिला क्षेत्रफल में बहुत छोटा है फिर भी मेरा अनुमान है कि 10-12 करोड़ रुपये अयोग्य अभ्यर्थियों से ऐंठ कट योग्य लोगों को बाहर बिठा दिया गया और अगर इतने छोटे जिले में इतनी बड़ी रकम वसूली गई तो प्रदेश भर में भ्रष्टाचार सैकड़ों करोड़ों का हुआ होगा इसकी पुष्टि सिर्फ़ दतिया में हुई अनिमतताओं को देखकर की जा सकती है। इस पूरी प्रक्रिया में ज़्यादा अंक देने के लिए जहाँ विवाहित अविवाहित बताया गया है वहीं मार्कशीट भी देश भर के कई कॉलेजों से फ़र्जी तैयार कराई गई है साथ ही दावे आपत्ति के लिए निश्चित समय से पहले ही पोर्टल बंद कर दिया गया जिससे मनमाने ढंग से भर्ती प्रकिया कर करोड़ों का लेन देन किया जा सके।
महिला बाल विकास विभाग द्वारा जिले स्तर पर की गई गड़बड़ी की जाँच तीन सदस्यीय आईएएस अधिकारियों की कमेटी बनाकर की जानी चाहिए और स्वयं मुख्यमंत्री जी को संज्ञान लेते हुए सख्त कार्यवाही कर दोषी अधिकारियों को सस्पेंड करने एवं FIR भी कटाना चाहिए तथा इम जांच की शुरुआत दतिया जिले से हो जिसके लिए हमारे द्वारा दिए गए प्रमाण काफ़ी हैं। इस माँग को लेकर हमाटा प्रतिनिधि मंडल प्रमुख सचिव महिला बाल विकास, मुख्य सचिव एवं मुख्य मंत्री से भी भेंट कर माँग पत्र सौंपने जा रहा है। फिर भी अगर कार्यवाही नहीं की गई तो हमाटा दलित पिछड़ा समाज संगठन एवं हमारी पार्टी राजधानी भोपाल में उग्र आंदोलन करेगी।
दतिया जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भतीं में हुए धाँधली का दस्तावेजों सहित एडवोकेट छोटू गौतम द्वारा किया गया खुलासा।
इस प्रेस वार्ता में DPSS के प्रदेश महासचिव अमित लोधी, एडवोकेट छोटू अहिरवार, अमित बंसोड़, कमल सिंह कुशवाह समेत अन्य नेता उपस्थित रहे।
दतिया जिले में अंतरिम सूची का नियमविरुद्ध प्रकाशन भर्ती प्रक्रिया में जाटी की गई अंतरिम सूची नियम के प्रतिकूल है। निराग के बिंदु के अनुसार यह सूची सार्वजनिक नहीं की जानी थी, लेकिन बावजूद इसके, इसे प्रकाशित कर दिया गया। यह साफ संकेत है कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई और पारदर्शिता का उल्लंघन हुआ।
2. दावा आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया में अनियमितता / गड़बड़िया-भर्ती प्रक्रिया MP Online चयन पोर्टल के माध्यम से संचालित की गई थी। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के लिए दावा आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि 17 अगस्त 2025 पोर्टल पर शॉ कर रही थी, लेकिन पोर्टल को पूर्व समय सीमा 14 अगस्त 2025 को ही बंद कर दिया गया। यह पूटी प्रक्रिया में अभ्यर्थियों को असमर्थ बनाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की साजिश के रूप में देखा जा रहा है।
3. विकासखंड स्तरीय समिति का नियमविरुद्ध हस्तक्षेप दतिया जिले में विकासखंड स्तरीय समिति द्वारा भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई। समिति ने खुद से निर्णय लेकर नियुक्तियों में दखल दिया, जो कि नियम के विरुद्ध था। इस प्रकार के हस्तक्षेप से प्रक्रिया की निष्पक्षता पूरी तरह से समाप्त हो गई।
उदाहरण-
महक कोरी, आंगनवाड़ी केंद्र 17-2 में बीपीएल अपलोड होने के बावजूद 2 अंक काटे गए। शिवानी अहीरवार, आंगनवाड़ी केंद्र खिटिया नाई में बीपीएल अपलोड होने के बावजूद 2 अंक काटे गए।
4. फर्जी अंकसूची के आधार पर आवेदिकाओं को पहला स्थान देकर नियुक्ति की गई-भर्ती प्रक्रिया के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से फर्जी अंकसूचियाँ बनवाई गई। छोटे-बड़े शेक्षणिक संस्थानों से फर्जी मार्कशीट प्राप्त कर उन्हें अंक दिए गए। नियम 8.5.5 में अंकसूची की सटीक जांच अनिवार्य है, लेकिन इसे पूटी तरह अनदेखा किया गया। यह भर्ती प्रक्रिया में घोटाले का प्रमाण है।
5. फर्जी BPL कार्ड बनाकर नियम विरुद्ध नियुक्ति की गई पूरे मध्य प्रदेश में, विशेष रूप से दतिया जिले में, फर्जी BPL कार्ड बनवाकर प्रायोजित ढंग से अंक दिए गए। वार्ड नंबर 1, 24, 2, 17 में फर्जी BPL कार्ड चनाकट महिला बाल विकास विभाग ने भी इन्हें मान्यता दी, जबकि नगरपालिका द्वारा इन्हें फर्जी बताया जा चुका हैं। इसके बावजूद भी महिला बाल विकास विभाग द्वाटा इनको नियुक्ति प्रक्रिया में अंक दिए गए।
6. भर्ती नियम B.1.2 का किया खुला उल्लंघन भर्ती नियम B.1.2 के अनुसार जहाँ रिक्त पद था आवेदिका को उसी ग्राम या वार्ड का स्थायी निवासी होना अनिवार्य था, किंतु नियमविरुद्ध जाकर आवेदिका जो की दूसरे ग्राम और वार्ड की निवासी हैं उन्हें पहले स्थान पर रखा गया।
उदाहरण- दतिया जिले की आंगनवाड़ी केंद्र चौवाया में रिमझिम चतुर्वेदी को प्रथम स्थान पर रखा गया, जबकि वो वहाँ की मूलनिवासी हैं ही नहीं।
7. ज्वाइनिंग के समय घोटाले का खुलासा-दतिया जिले के आंगनवाड़ी केंद्र वार्ड नंबर 02 में सहायिका के रूप में चयनित वबीता रायकवार ने आवेदन पत्र में अविवाहित होने का दावा किया था, लेकिन ज्वाइनिंग के समय उनके फोटो से स्पष्ट हो गया कि वह विवाहित हैं। उनके पति का नाम सतीश रायकवार है, जो उत्तर प्रदेश के बबीना जिले के निवासी हैं। अधिकारियों द्वारा बिना जांच पड़ताल के ही नियुक्ति दे दी गई।
8. पूरे प्रदेश में घोटाले का दायरा यह केवल दतिया जिले तक सीमित नहीं है। भर्ती प्रक्रिया के नियम B.2.1 के अनुसार अंकसूची सेल्फ प्रमाणित होनी चाहिए थी, लेकिन पूरे प्रदेश में इस नियम को नजरअंदाज कर गलत तरीके से अंक दिए गए। यह एक संगठित भ्रष्टाचार की दिशा में इशारा करता है।
9. खंडस्तटीय समिति एवं विभागीय अधिकारियों द्वाटा करोड़ों की डील दतिया जिले में गठित खंडस्तरीय समिति ने भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया। समिति ने कटोड़ों रूपये की डील कर भर्ती प्रक्रिया को गड़बड़ाया। इससे साफ हो गया है कि समिति ने अपने दायित्व का उल्लंघन करते हुए निजी स्वार्थ को प्राथमिकता दी।
10. मही नियुक्तियों को रालत और ग़लत नियुक्तियों को सही बताया गया-पूरे भर्ती प्रक्रिया में सच को झूठ और झूठ को सच बताया गया। अनेक योग्य अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से बाहर रखा गया, जबकि फर्जी दस्तावेज वाले अभ्यर्थियों को नौकटी दिलाई गई।
ILIAS कमेटी से निष्पक्ष जांच की माँग इस गंभीर भ्रष्टाचार के मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दामोदर सिंह यादव जी ले प्रदे सरकार से प्रदेश स्तटीय तीन सदस्यों की IAS कमेटी गठित करने की मांग की है, ताकि पूरे प्रकरण की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच हो सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित हो।
12. सैकड़ों करोड़ का भ्रष्टाचार-दतिया जिले का ही उदाहरण लें, जहां 10 तो 15 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हुआ है। यदि पूरे श का हिसाब लगाया जाए, तो सैकड़ों करोड़ रुपये की घोटाला संपन्न होने की संभावना है। यह न केवल भर्ती प्रक्रिया की विकास बल्कि राज्य के विकास और महिला सशक्तिकरण पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।
