"सार्थक कर्मचारी संगठन" का बड़ा फैसला — मप्र शासकीय वाहन चालक यांत्रिक कर्मचारी संघ में हूआ विलय संगठन में नया जोश, प्रदेश अध्यक्ष साबिर खान के नेतृत्व में कर्मचारियों की आवाज़ और भी बुलंद
"सार्थक कर्मचारी संगठन" का बड़ा फैसला — मप्र शासकीय वाहन चालक यांत्रिक कर्मचारी संघ में हूआ विलय
संगठन में नया जोश, प्रदेश अध्यक्ष साबिर खान के नेतृत्व में कर्मचारियों की आवाज़ और भी बुलंद
संतोष योगी की खबर 9993268143
भोपाल।मध्य प्रदेश के कर्मचारी संगठनों के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में 'सार्थक कर्मचारी संगठन' ने मध्य प्रदेश शासकीय वाहन चालक यांत्रिक कर्मचारी संघ में औपचारिक रूप से विलय कर लिया है। इस कदम से कर्मचारी एकता को नई मजबूती मिली है और यह माना जा रहा है कि अब कर्मचारियों की समस्याओं की लड़ाई और भी संगठित एवं प्रभावशाली तरीके से लड़ी जाएगी।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष साबिर खान के नेतृत्व में संगठन की भागीदारी और सक्रियता निरंतर बढ़ रही है। इस मौके पर सभी नव संलग्न पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि साबिर खान के नेतृत्व में कर्मचारियों की आवाज़ पहले से कहीं अधिक प्रभावी रूप से शासन-प्रशासन तक पहुंचेगी।
नगर निगम शाखा के अध्यक्ष इरफान अल्ताफ ने जानकारी दी कि संगठन में सभी पदाधिकारी पूरी निष्ठा और समर्पण से कार्य कर रहे हैं। संघ के संरक्षक जफर हसन एवं सलाहकार हसीब अंसारी, मोहम्मद बिलाल, अदनान अहमद, सलमान खान, जफर अली, असीम अली, मोहम्मद जावेद, वसीम और मंजर अली की सक्रिय भूमिका संगठन को मजबूत आधार प्रदान कर रही है।
इस अवसर पर नगर निगम सफाई मित्र यूनियन के अध्यक्ष मुशीर मोहम्मद ने भी अपनी पूर्ण सहभागिता जताई और कहा कि संगठन को और मजबूत बनाने के लिए सभी कर्मचारी एकजुट होकर कार्य करेंगे।
सक्रिय सदस्यों में शामिल:
विनोद चौहान, अरविन्द वैद, मोहम्मद हामिद खान, गोविन्द मीणा, वसी सुल्तान, बब्लु धौलपुरिया, दिनेश करोसिया, लखन लड़द, विक्रम मीणा, संतोष सिंह, शोभाराम पिपरिया, शकील, सादिक, याया, अंसार, अशपाक, शाहनवाज, फेजान, युसूफ, समी, फैसल, अयूब भाई और एहसान खान जैसे समर्पित सदस्यों का संगठन में विशेष योगदान रहा है।
भविष्य की दिशा:
संघ द्वारा कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा, नियमितीकरण, वेतन विसंगतियों और कार्यस्थल की समस्याओं को लेकर कई जनहितकारी कार्यक्रमों की योजना बनाई जा रही है। संगठन का उद्देश्य न सिर्फ कर्मचारियों की आवाज़ बुलंद करना है, बल्कि उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को भी बेहतर बनाना है।
