पंचायत सचिवों ने भरी हुंकार: भोपाल चिंतन सम्मेलन में गूंजे अधिकारों के स्वर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हुई सौहार्दपूर्ण मुलाकात, मांगा न्यायपूर्ण समाधान

 

संतोष योगी की खबर 9993268143

 

भोपाल। मध्यप्रदेश पंचायत सचिव संगठन का वार्षिक चिंतन सम्मेलन राजधानी भोपाल के मायाराम सुरजन कम्युनिटी हॉल में उत्साह और जोश के साथ सम्पन्न हुआ। इसमें प्रदेशभर के 52 जिलों से आए संगठन पदाधिकारियों, जिला एवं ब्लॉक अध्यक्षों ने भाग लिया। सम्मेलन में पंचायत सचिवों ने एकजुट होकर वर्षों से लंबित मांगों को लेकर सरकार से न्याय की मांग की।

 

25 साल की सेवा पर भी सम्मान से वंचित – प्रांताध्यक्ष

 

प्रांताध्यक्ष नरेंद्र सिंह राजपूत ने उद्घाटन भाषण में कहा कि पंचायत सचिवों ने बीते 25 वर्षों से विकास की नींव रखी है, लेकिन अब तक उन्हें दोयम दर्जे का ही व्यवहार मिला है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की अधिकांश योजनाएं पंचायत सचिवों की मेहनत से ही धरातल पर उतरती हैं, बावजूद इसके सचिवों को वह सम्मान, वेतन और अधिकार नहीं मिल पाए जिसके वे वास्तविक हकदार हैं।

 

सम्मेलन में उठीं मुख्य मांगें

 

पंचायत सचिवों के समयमान वेतनमान को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हों।

 

ग्रेच्युटी की सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर शीघ्र निर्णय लिया जाए।

 

6वां, 7वां वेतनमान और 3 अगस्त 2023 को घोषित समयमान वेतनमान का एरियर सहित भुगतान किया जाए।

 

 

"हम ग्रामीण भारत के असली निर्माता" – महामंत्री

 

महामंत्री धर्मेंद्र जोशी ने पंचायत सचिवों को ग्रामीण भारत का असली निर्माता बताते हुए कहा "हमारा खून-पसीना ग्रामीण विकास की ईंटों में रचा-बसा है, लेकिन अब पंचायत सचिव अपने हक के लिए संघर्ष को तैयार हैं।"

 

 

 

मुख्यमंत्री से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात

 

सम्मेलन के बाद संगठन के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से उनके निवास पर मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रांताध्यक्ष नरेंद्र सिंह राजपूत ने किया। मुख्यमंत्री ने सभी मांगों को गंभीरता से सुनते हुए उचित समाधान का भरोसा दिया और संगठन के आगामी महासम्मेलन की तारीख तय करने का भी आश्वासन दिया।

 

आंदोलन की चेतावनी

 

सम्मेलन के समापन पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हुआ कि यदि पंचायत सचिवों की जायज मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ, तो संगठन चौपाल से लेकर भोपाल तक चरणबद्ध आंदोलन करेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन की जिम्मेदारी सरकार की होगी।

 

भारी संख्या में जुटे प्रतिनिधि

 

सम्मेलन में प्रदेश उपाध्यक्ष खुमान सिंह चौहान, संभाग अध्यक्ष रणवीर सिंह रघुवंशी, कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष सुरेश विश्वकर्मा, प्रादेशिक प्रवक्ता राजेंद्र सिंह चौधरी, झाबुआ जिला अध्यक्ष राम सिंह बिलवाल, इंदौर जिला अध्यक्ष गौरव जोशी, देवास जिला अध्यक्ष आनंद सिंह ठाकुर सहित उमरिया, मंडला, शहडोल, शिवपुरी, गुना, सागर, बालाघाट, रायसेन, भोपाल, विदिशा, धार, खरगोन, अलीराजपुर, बुरहानपुर, खंडवा और अन्य जिलों के पदाधिकारी व सैकड़ों पंचायत सचिव मौजूद रहे।

 पंचायत सचिवों की एकजुटता और संघर्ष का यह स्वरूप आने वाले समय में सरकार को निर्णय लेने के लिए मजबूर कर सकता है। सचिवों ने साफ कहा – “अब चुप नहीं बैठेंगे, जब तक हक नहीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।”