कुशवाहा भवन पर कब्जे की साजिश नाकाम, हाईकोर्ट के आदेश पर जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

 

 

संतोष योगी की खबर 

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भोपाल। हाईकोर्ट के निर्देश पर असिस्टेंट रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं भोपाल व नर्मदापुरम संभाग द्वारा की गई जांच में कछवाहा कुशवाहा क्षत्रिय सभा का फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में संस्था द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों को अवैध पाया गया। संस्था को निरस्त करते हुए फर्म एंड सोसायटी ने थाना टीटी नगर को पत्र लिखकर वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

 

राजधानी के सेकंड स्टॉप स्थित अंजलि कॉम्प्लेक्स में 5 हजार वर्गफीट क्षेत्र में निर्मित कुशवाहा भवन को हड़पने के लिए लंबे समय से साजिशें रची जा रही थीं। यहां 15 वर्षों तक अवैध कब्जा कर गर्ल्स हॉस्टल व अनैतिक गतिविधियां संचालित की गईं। इस दौरान संस्था के पदाधिकारियों द्वारा शासन को भ्रमित करने के लिए 45 वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट और पदाधिकारियों की सूची एक साथ प्रस्तुत कर दी गई।

 

सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब वर्ष 2016 की पदाधिकारियों की सूची में दिवंगत वरिष्ठ भाजपा नेता बाबूलाल भानपुर के फर्जी हस्ताक्षर पाए गए, जबकि उनका निधन 23 नवंबर 2016 को हो चुका था।

 

प्रांतीय कुशवाहा समाज मप्र के अध्यक्ष योगेश मानसिंह कुशवाहा और संरक्षक नारायण सिंह कुशवाहा ने बताया कि समाजजनों के संघर्ष से भवन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। अब यहां सामाजिक गतिविधियां, छात्रावास और लाइब्रेरी संचालित हो रही हैं।

 

जांच में यह भी सामने आया कि कछवाहा कुशवाहा क्षत्रिय सभा के अलावा मप्र कुशवाहा भवन निर्माण समिति नाम की दूसरी संस्था का भी उपयोग भवन हड़पने के लिए किया गया था। इसमें भी उन्हीं पदाधिकारियों के नाम शामिल थे। दोनों संस्थाओं को फर्म एंड सोसायटी ने अवैध घोषित कर निरस्त कर दिया है।

 

इस पूरे फर्जीवाड़े में सीताराम कुशवाहा, राकेश कुशवाहा, मोहन कुशवाहा, रामनारायण कुशवाहा, मंगल कुशवाहा समेत अन्य लोग शामिल पाए गए हैं। इन पर फर्जी दस्तावेज बनाकर भवन हड़पने, शासन को गुमराह करने और अवैध गतिविधियों के संचालन का आरोप है।

 

फिलहाल मामला टीटी नगर थाना पुलिस जांच के अधीन है।