भोपाल में प्रीपेड स्मार्ट मीटर और निजीकरण के खिलाफ गरजे बिजली उपभोक्ता, 6 अक्टूबर को होगा राज्यस्तरीय विरोध प्रदर्शन

 

संतोष योगी की खबर

 99932 68143

 

आज 3 अक्टूबर को बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन की ओर से भोपाल के 9 मसाला रेस्टोरेंट में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में मध्य प्रदेश बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन की प्रदेश संयोजिका रचनाअग्रवाल ,राकेश मिश्रा जी, नरेंद्र भदोरिया जी, लोकेश शर्मा, प्रदीप आर बी, मुदित भटनागर, रवि शर्मा बंजारा ने प्रेस मीडिया को संबोधित किया। 6अक्टूबर को प्रीपेड़ स्मार्ट मीटर योजना और बिजली जैसे आवश्यक सेवा क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में जुटेंगे पूरे प्रदेश से बिजली उपभोक्ता। आंदोलन तेज करने का ऐलान भी किया गया। मध्य प्रदेश बिजली उपभोक्ता संगठन की प्रदेश संयोजिका रचना अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया को बताया कि आज मध्य प्रदेश सही देश भर में बिजली उपभोक्ताओं द्वारा बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटर का विरोध किया जा रहा है यह विरोध कोई औपचारिकता या कोई निहित स्वार्थ पर आधारित राजनीतिक विरोध नहीं है बल्कि हमारी दैनिक आय और जीवन मरण के प्रश्न के साथ ओत प्रोत रूप से जुड़ा हुआ है हाल ही में हम इसके दुष्परिणामों को पूरे देश भर में देख सुन रहे हैं मध्य प्रदेश भी इससे अछूता नहीं है लेकिन जो लोग नीतिगत तौर पर इस योजना को देख रहे हैं वह जानते हैं की ये योजना बिजली जैसी अत्यंत आवश्यक सेवा को बड़े-बड़े कॉर्पोरेट के हाथों मुनाफा कमाने के लिए छोड़ देने की एक योजना है , प्रीपेड स्मार्ट मीटर "रिवेम्प्ड डिस्ट्रिव्यूशन सेक्टर स्कीम" के तहत लगाये जा रहे हैं जो कि संसद में लंबित बिजली संशोधन विधेयक 2022 लागू करने का चोर दरवाजा है। प्रदेश की राजधानी भोपाल में आम उपभोक्ताओं ने यह बताया है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली के बिल महीने में दो बार आ रहे हैं हर 15 दिन में बिजल बिल दिया जा रहा है और बिल की राशि 5000 से लेकर 50000,तक आ रही है जिसके कारण उपभोक्ता बिल नहीं भर पा रहे हैं और बिल न भरने पर उनकी बिजली काट दी जा रही है लोग अंधेरे में रहने पर मजबूर है यही हाल पूरे प्रदेश का है।जहां स्मार्ट मीटर लगे हैं उन सभी जिलों में उपभोक्ता बिजली बिलों से पीड़ित है ।

लोग अपने गहने और बर्तन बेचकर बिल भर रहे हैं। अखबारों ने भी यह रिपोर्ट छापी है। मध्य प्रदेश में 2019 में बिजली कंपनियों को निजी हाथों में बेचने की घोषणा की गई।कहा गया की बिजली कंपनी घाटे में चल रही है। जबलपुर हाई कोर्ट में जब किसी ने याचिका दायर की तब यह ज्ञात हुआ कि मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा बिजली कंपनी के निजी बिजली उत्पादक कंपनियों के साथ ऐसे बिजली खरीद समझौते करवाए गए हैं जिसके अनुसार बिजली कंपनी निजी कंपनी से बिजली ले या ना ले लेकिन उसको एक निश्चित पैसा चुकाना होगा । यह राशि कितनी अधिक है इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि सरकारी बिजली कंपनी के द्वारा निजी बिजली उत्पादक कंपनी को 2018 में इस बिजली खरीद समझौते के तहत 6625 करोड रुपए चुकाए । जिससे मध्य प्रदेश की बिजली कंपनी घाटे में आ गई और उसको दिखाकर मध्य प्रदेश में बिजली क्षेत्र का निजीकरण शुरू कर दिया गया है। जबकि वास्तविकता यह है कि बिजली कानून 2003 बनाकर बिजली क्षेत्र में निजीकरण 

 का रास्ता पहले ही तैयार कर लिया गया था।

मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लोग स्वत: स्फूर्त इस प्रीपेड मीटर का विरोध इसलिए कर रहे हैं कि इन मीटरों से उनका बिल हजारों और कहीं कहीं लाखों रुपये में पहुंच गया है।

 यह आंदोलन हर बिजली उपभोक्ता का है

इसलिए आगामी 6 अक्टूबर को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक राज्य स्तरीय विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा हैआम उपभोक्ता से आग्रह है कि इसमें बड़ी संख्या में शामिल हों।

 

द्वारा

 

रचना अग्रवाल -संयोजक

लोकेश शर्मा - संयोजक 

 

मध्य प्रदेश बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन