किसान आत्महत्या कर रहे हैं, मुख्यमंत्री अब तक नहीं मिले — किसानों ने किया आंदोलन का ऐलान

भाव दो, खाद दो, मुआवजा दो, जमीन की लूट बंद करो” के नारे के साथ संयुक्त किसान मोर्चा मैदान में

 

भोपाल से संतोष योगी की खबर 

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देश के साथ मध्यप्रदेश के किसानों की लगातार बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए संयुक्त किसान मोर्चा (एस.के.एम.) मध्यप्रदेश की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपस्थित किसान नेताओं ने कहा कि अतिवृष्टि से तबाह हुए किसानों के प्रति सरकार का रवैया पूरी तरह गैरजिम्मेदाराना है।

 

बैठक में खाद की भारी किल्लत, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी में असफलता, भावांतर योजना के नाम पर किसानों को ठगने, बिजली न आने के बावजूद भारी बिल थमाने और स्मार्ट मीटर थोपने जैसी समस्याओं पर चर्चा हुई। साथ ही, लैंड पूलिंग और मनमाने तरीके से कृषिभूमि के अधिग्रहण एवं आदिवासियों की बेदखली के मामलों को लेकर भी तीखी आलोचना की गई।

 

“कृषि मंत्री इसी प्रदेश के, फिर भी हालात बदतर”

 

मोर्चे ने आरोप लगाया कि इन नीतिगत विफलताओं के कारण मध्यप्रदेश में किसानों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हाल ही में कई सोयाबीन किसानों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया है। इसके बावजूद राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

मोर्चे ने कहा कि देश के कृषि मंत्री इसी प्रदेश से हैं, फिर भी किसानों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

किसान नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अब तक अपने कार्यकाल में एक बार भी किसान प्रतिनिधियों से मुलाकात तक नहीं की है, जो सत्ता के अहंकार और किसान समुदाय के प्रति अवज्ञा को दर्शाता है।

 

दो चरणों में होगा आंदोलन

 

संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कि मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजकर उनसे किसानों से शीघ्र चर्चा करने और निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों पर ठोस समाधान निकालने का आग्रह किया जाएगा।

यदि सरकार ने सकारात्मक कार्यवाही नहीं की, तो दो चरणों में आंदोलन किया जाएगा —

 

पहला चरण: 15 अक्टूबर को प्रदेशभर में कलेक्टरी और तहसीलों पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

 

दूसरा चरण: यदि 10 दिन में कार्रवाई नहीं होती, तो 27 अक्टूबर को राजधानी भोपाल में विशाल किसान प्रदर्शन किया जाएगा।

 

 

संयुक्त किसान मोर्चे की प्रमुख 10 मांगें:

 

भावान्तर नहीं, भाव चाहिए — भावांतर योजना किसानों के हित में नहीं बल्कि बड़ी कंपनियों के फायदे के लिए है। इसे तुरंत रद्द कर सभी फसलों की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित की जाए।

धान का दाम ₹3300 प्रति क्विंटल घोषित किया जाए — चुनाव घोषणा पत्र में धान का मूल्य ₹3100 तय करने का वादा किया गया था, अब उसी अनुपात में दर बढ़ाई जाए।

अतिवृष्टि क्षति का वास्तविक मुआवजा मिले — सैटेलाइट सर्वे की जगह पटवारी हल्के को इकाई मानकर औसत उपज में कमी के आधार पर नुकसान की भरपाई की जाए।

खाद संकट समाप्त हो — जरूरत से पहले पर्याप्त खाद का भंडारण कर प्रत्येक किसान को समय पर उपलब्ध कराया जाए।

 नकली खाद-बीज पर सख्त कार्रवाई — जिम्मेदार अधिकारियों और सौदागरों को जेल भेजा जाए।

लैंड पूलिंग व जबरिया अधिग्रहण रोका जाए — 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत ही मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।

किसानों को 12 घंटे दिन में बिजली मिले — बढ़े हुए बिजली बिल निरस्त किए जाएं और स्मार्ट मीटर योजना रद्द हो।

आत्महत्या पीड़ित परिवारों को मुआवजा और नौकरी — मृत किसानों के आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाए।कपास किसानों को घाटे की भरपाई मिले — मुक्त व्यापार समझौते से कृषि को बाहर रखा जाए और टैरिफ के असर से किसानों को राहत दी जाए।

रबी फसलों का MSP स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार तय किया जाए — वर्तमान दरों से किसानों को करीब ₹3 लाख करोड़ का नुकसान हो रहा है।

 

 

बैठक में उपस्थित और समर्थन देने वाले संगठन

बैठक की अध्यक्षता बीकेयू (टिकैत) के अनिल यादव ने की।

इस अवसर पर अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज, मप्र किसान सभा (शाकिर सदन) के प्रहलाद वैरागी, किसान जागृति संगठन के इरफान जाफरी, तथा बीकेयू (महाशक्ति) के प्रदेश अध्यक्ष राम जगदीश दांगी सहित अनेक किसान नेता उपस्थित रहे।

समर्थन देने वालों में आराधना भार्गव (किसान संघर्ष समिति), अखिलेश यादव (मप्र किसान सभा बीटीआर भवन), मनीष श्रीवास्तव (आल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन), भगवान भाई (नर्मदा बचाओ आंदोलन), बाबू सिंह राजपूत (क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन), विजय कुमार (आल इंडिया किसान क्रांतिकारी सभा), उमेश तिवारी (टोको, रोको, ठोको मोर्चा), बबलू जाधव (भारतीय किसान एवं मजदूर सेना), संदीप सिंह ठाकुर (भारतीय श्रमिक जनशक्ति यूनियन), बुद्धसेन सिंह गोंड (मप्र आदिवासी एकता महासभा) और राजकुमार सिन्हा (NAPM एवं बरगी बांध विस्थापित संघ, चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति) शामिल हैं।