मंडी बोर्ड को लोन लेने के लिए विवश किया जा रहा — संयुक्त संघर्ष मोर्चा कर्मचारियों ने तीसरे दिन भी काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
मंडी बोर्ड को लोन लेने के लिए विवश किया जा रहा — संयुक्त संघर्ष मोर्चा
कर्मचारियों ने तीसरे दिन भी काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
संतोष योगी की खबर
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भोपाल।
मध्य प्रदेश संयुक्त संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में प्रदेशभर की मंडियों के कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने आज तीसरे दिन भी काली पट्टी बांधकर कार्य करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य शासन द्वारा सोयाबीन भावांतर योजना के लिए मंडी बोर्ड पर 1500 करोड़ रुपए का ऋण लेने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे मंडी बोर्ड की वित्तीय स्थिति पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार राज्य परिवहन निगम, दुग्ध संघ और तिलहन संघ आर्थिक संकट में फंसकर बंद हो गए, उसी तरह मंडी बोर्ड को भी योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया जा रहा है।
दीक्षित ने कहा कि शासन के इस निर्णय से मंडी बोर्ड दिवालिया होने की कगार पर पहुंच सकता है, क्योंकि पहले भी लगभग 2000 करोड़ रुपए राज्य शासन द्वारा मंडी बोर्ड से लिए गए थे, जो आज तक वापस नहीं किए गए हैं।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के संयोजक श्री बी. बी. फौजदार ने कहा कि शासन द्वारा लिया जा रहा नया ऋण मंडी बोर्ड के लिए घातक सिद्ध होगा। “क्या गारंटी है कि यह 1500 करोड़ का ऋण लौटाया जाएगा?” उन्होंने सवाल उठाया।
संघर्ष मोर्चा के वरिष्ठ पदाधिकारियों अंगिरा प्रसाद पांडे, रामवीर किरार, नैन सिंह सोलंकी, वीरेंद्र नरवरिया, मनीष गंगराड़े, सदानंद कापसे, मोहन कीर्तने, उल्लास पटेल और सुभाष महाजन ने प्रदेशभर के मंडी कर्मचारियों और अधिकारियों से आह्वान किया है कि 29 अक्टूबर को भोपाल में आयोजित गेट मीटिंग एवं धरना प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों।
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष मंडी बोर्ड की सुरक्षा, कर्मचारियों के अधिकारों और प्रदेश के किसान, व्यापारी, हम्माल व तौलतियों के हितों की रक्षा के लिए है।
