भोपाल बिड़ला मंदिर में श्रीराम कथा: डॉ. सुरेंद्र बिहारी गोस्वामी जी ने बताया — “मानव सेवा ही परम धर्म है”

 

संतोष योगी की खबर 

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भोपाल हेडलाइंस बिड़ला मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा के दौरान कथा व्यास डॉ. सुरेंद्र बिहारी गोस्वामी जी ने आज के प्रवचन में कहा कि अभिमान तीन प्रकार का होता है — राजसी, तामसी और सात्विक, और यही तीनों प्रकार के अभिमान हमें भगवान के सान्निध्य में जाने से रोकते हैं।

 

कथा में आज भगवान श्रीराम के वनवास एवं केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन हुआ। डॉ. गोस्वामी जी ने बताया कि जब केवट ने भगवान श्रीराम के चरण पखारे, तब उसने अपने पूरे परिवार को वह चरणामृत दिया। इतना ही नहीं, उसने अपने पितृगणों का आवाहन कर उन्हें भी भगवान के चरणामृत से मुक्ति प्रदान की।

 

जब भगवान श्रीराम ने केवट को नाव की उतराई देना चाही, तब केवट ने विनम्रता से कहा — “प्रभु! मेरा सारा जीवन मजदूरी में बीता है, पर आज पहली बार मुझे सच्ची मजदूरी मिली है — आपकी सेवा करने का सौभाग्य।”

 

डॉ. गोस्वामी जी ने कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक होता है जब वह भगवान की बनाई सृष्टि में मानव सेवा करे, क्योंकि मानव सेवा ही परम धर्म है।

 

इस अवसर पर सर्वशक्ति महिला मंडल की ओर से श्रीमती शकुंतला अग्रवाल, श्रीमती संजना बघेल, श्रीमती पूनम झावर, श्रीमती कविता शास्त्री एवं श्री के.के. पाण्डेय जी ने व्यास पूजन किया।

कार्यक्रम का संचालन पंडित अमितानंद द्वारा किया गया।