अवैध कॉलोनियों पर मंडल अध्यक्ष की शिकायत के बाद मचा हड़कंप — विक्रेता, क्रेता और जिम्मेदार अफसरों की उड़ी नींद
अवैध कॉलोनियों पर मंडल अध्यक्ष की शिकायत के बाद मचा हड़कंप — विक्रेता, क्रेता और जिम्मेदार अफसरों की उड़ी नींद
भोपाल हेडलाइंस सिराली संवाददाता संजय योगी की खबर
सिराली।
नगर सिराली में अवैध कॉलोनियों का मुद्दा अब बड़ा रूप ले चुका है। भारतीय जनता पार्टी मंडल अध्यक्ष अनिल राजपूत द्वारा खिरकिया की अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) शिवांगी बघेल को सौंपे गए ज्ञापन के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। ज्ञापन में मंडल अध्यक्ष ने सिराली क्षेत्र में सक्रिय कॉलोनी माफियाओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग कृषि भूमि को अवैध रूप से कॉलोनियों में तब्दील कर भोले-भाले नागरिकों से ठगी कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, सिराली क्षेत्र में मालपुर रोड, बायपास छात्रावास के पास, सांवरिया गार्डन क्षेत्र, चारवा रोड और मस्जिद के समीप तकरीबन 20 एकड़ से अधिक भूमि पर अवैध प्लॉटिंग की जा रही थी। इन कॉलोनियों में न तो सड़कें हैं, न बिजली, न नालियां — बावजूद इसके कॉलोनाइजर नागरिकों को झूठे वादे कर भूखंड बेच रहे थे। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि एसडीएम ने इस पूरे प्रकरण पर तत्काल रिपोर्ट तलब करने की तैयारी शुरू कर दी है।
राजपूत ने अपने ज्ञापन में कहा कि “यह सिर्फ अवैध कॉलोनियों का मामला नहीं, बल्कि यह अवैध वित्तीय लेनदेन और हवाला कारोबार से जुड़ा एक बड़ा नेटवर्क है।” उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित कॉलोनाइजरों की बैंकिंग और संपत्ति की जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उन्होंने जो धन निवेश किया, वह वैध है या नहीं।
ज्ञापन के बाद अवैध प्लॉटिंग करने वाले विक्रेताओं, उनसे भूमि खरीदने वाले क्रेताओं, और इस पूरे मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की नींद उड़ गई है। कुछ कॉलोनाइजरों ने तो अपने दफ्तरों के बोर्ड तक हटा दिए हैं, जबकि कई ने प्लॉटों की बिक्री अस्थायी रूप से रोक दी है।
स्थानीय नागरिकों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि “नगर में पहली बार इस तरह की ठोस पहल हुई है। यदि प्रशासन सख्ती दिखाए तो सिराली क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग पर अंकुश लगेगा।”
वहीं, यह सवाल भी उठ रहा है कि सिराली में इतने लंबे समय से अवैध कॉलोनियां फलफूल रही थीं, फिर भी स्थानीय प्रशासन और नगरीय निकाय के अधिकारी चुप क्यों बैठे रहे। यह उनकी गंभीर लापरवाही और उदासीनता को दर्शाता है। अधिकारियों की आंखों के सामने अवैध कॉलोनियां विकसित होती रहीं और वे मूकदर्शक बने रहे।
कई नागरिकों ने बताया कि जिन लोगों ने इन कॉलोनियों में प्लॉट खरीदकर मकान बनाए हैं, वे आज मूलभूत सुविधाओं — जैसे सड़क, पानी, नाली और बिजली — के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उनका कहना है कि “यदि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते कार्रवाई करते, तो हमें यह परेशानी न झेलनी पड़ती।”
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है। क्या केवल औपचारिक जांच होगी या फिर जिम्मेदार कॉलोनाइजरों और अधिकारियों पर ठोस कार्यवाही भी की जाएगी। जनता की नजरें अब प्रशासनिक कदमों पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला न केवल भूमाफिया पर, बल्कि सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
