भोपाल कज़ियात में नियमित भर्ती और इमाम-मोअज्जिनों को कलेक्टर रेट से वेतन देने की मांग

संतोष योगी की खबर 

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भोपाल ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी ने भ्रष्टाचार, फर्जी नियुक्तियों और फंड घोटाले की जांच की मांग को लेकर मंत्री कार्यालय में सौंपा ज्ञापन

भोपाल। ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी ने अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर भोपाल कज़ियात में नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और भोपाल की मस्जिदों में कार्यरत इमामों व मोअज्जिनों को कलेक्टर रेट के अनुसार वेतन देने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि भोपाल मसाजिद कमेटी भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी है, जहां अवैध नियुक्तियों, फर्जी नोटिफिकेशन और फंड के दुरुपयोग के गंभीर आरोप हैं। 1949 में भोपाल रियासत भारत में विलय के बाद सभी संस्थान भारत सरकार के अधीन संचालित हो गए थे, परंतु भोपाल कज़ियात आज भी पुरानी व्यवस्था के अनुसार चल रही है। नियमित भर्ती नहीं होने से मनमाने तरीके से नियुक्तियां की जा रही हैं और शक जताया गया कि भर्ती के नाम पर धनवसूली हो रही है। ज्ञापन में बताया गया कि 2020 में भोपाल शहर काज़ी ने उच्च न्यायालय में तलाक न करवाने का शपथपत्र दिया था, लेकिन इसके बावजूद लगभग 3000 तलाक भोपाल कज़ियात में करवाए जा चुके हैं। कांग्रेस सरकार के समय जारी फर्जी गजट नोटिफिकेशन के आधार पर कुछ कर्मचारियों को 5वें और 7वें वेतनमान का लाभ दिया जा रहा है जबकि विधानसभा में ऐसा कोई नियम पारित नहीं हुआ। भोपाल कज़ियात को शासन से प्रतिवर्ष 3.88 करोड़ रुपये का अनुदान और निकाह आदि से लगभग 1 करोड़ रुपये की आय होती है, फिर भी इमाम और मोअज्जिन मात्र 1500 से 5000 रुपये वेतन पर गुजारा कर रहे हैं, जबकि मसाजिद कमेटी के गैर-सरकारी कर्मचारी ऊंचे वेतनमान का लाभ ले रहे हैं। दारुल कज़ा में जहां पहले दो काज़ी के पद थे अब चार काज़ी नियुक्त हैं जिससे शासन व समुदाय का धन व्यर्थ जा रहा है। जो इमाम व मोअज्जिन इन घोटालों के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उनका ट्रांसफर दूरस्थ इलाकों में कर दिया जाता है जो नियम विरुद्ध व मानसिक शोषण है। 1949 के मर्जर एग्रीमेंट में मस्जिदों और उनके कर्मचारियों के आर्थिक व सामाजिक सम्मान की गारंटी दी गई थी, परंतु आज इसका पालन नहीं हो रहा और फंड फर्जी कर्मचारियों पर खर्च किया जा रहा है। कमेटी ने सरकार से मसाजिद कमेटी और कज़ियात की संपूर्ण जांच, अवैध नियुक्तियों को रद्द करने तथा इमामों-मोअज्जिनों को कलेक्टर रेट से वेतन देने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वालों में शमशुल हसन, मो. दानिश खान, तनवीर कुरैशी, शेख इस्माइल, आज़म हफीज खान, आरिफ खान, दाऊद हसन, सैयद तारिक शरीफ, शेख एजाज़, मो. उमर, मो. ज़ाहिर और मो. सलीम शामिल रहे।