भारत में पहली बार भोपाल में स्थापित हुई कोरोवेंटिस कोरो फ्लो हृदय जांच प्रणाली अब ‘इनविज़िबल’ माइक्रोवैस्कुलर बीमारी होगी सटीक रूप से पहचान
भारत में पहली बार भोपाल में स्थापित हुई कोरोवेंटिस कोरो फ्लो हृदय जांच प्रणाली अब ‘इनविज़िबल’ माइक्रोवैस्कुलर बीमारी होगी सटीक रूप से पहचान
संतोष योगी की खबर 99932 68143
भोपाल,/भारत के हृदय रोग निदान क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए भोपाल ने देश में पहली बार कोरोवेंटिस कोरोफ्लो कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम की स्थापना की है। वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पंकज मनोरिया ने पत्रकार वार्ता में इस अत्याधुनिक प्रणाली का उद्घाटन करते हुए बताया कि यह भारत का पहला डॉक्युमेंटेड इंस्टॉलेशन और पहला डॉक्युमेंटेड केस है, जो सीधे शिक्कीस्वार कंपनी से स्थापित किया गया है।
एंजियोग्राफी से छिपी रहने वाली माइक्रोवैस्कुलर बीमारी अब होगी पकड़ में
डॉ. मनोरिया ने बताया कि पारंपरिक एंजियोग्राफी केवल बड़ी कोरोनरी धमनियों को दिखाती है, जबकि बेहद पतली माइक्रोवैसल्स उसमें नहीं दिख पातीं।
उन्होंने कहा—
"कई मरीजों को बार-बार एंजाइना होता है, लेकिन एंजियोग्राफी सामान्य आती है। हम यह तक नहीं जान पाते थे कि दर्द हार्ट से है या किसी और कारण से। अब कोरोफ्लो जांच माइक्रोवैसल्स के भीतर फ्लो और रेजिस्टेंस को सीधे मापकर माइक्रोवैस्कुलर डिसफंक्शन का सटीक निदान कर देती है।"
यह एडवांस्ड इनवेज़िव तकनीक एंजियोग्राफी के दौरान विशेष वायर के माध्यम से वास्तविक कोरोनरी फ्लो को मापती है और उन मरीजों के लिए स्पष्टता लाती है जिनकी समस्या एंजियो या एंजियोप्लास्टी के बाद भी अनसुलझी रहती थी।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने तकनीक को बताया गेम-चेंजर
लंदन स्थित इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संदीप कालरा ने कहा—
"माइक्रोवैस्कुलर एंजाइना दुनिया की सबसे कम पहचानी जाने वाली हृदय समस्या है। मरीज वर्षों तक बिना सही निदान के परेशान रहते हैं। कोरो फ्लो विज्ञान-आधारित और मापनीय डेटा प्रदान करता है, जिससे सटीक निदान संभव हो पाता है। इस इंस्टॉलेशन के साथ भोपाल दुनिया के चुनिंदा केंद्रों में शामिल हो गया है जहाँ यह विश्व-स्तरीय माइक्रोवैस्कुलर असेसमेंट तकनीक उपलब्ध है।"
उन्नत पैरामीटर्स से मिलेगा सटीक निदान
कोरोफ्लो प्रणाली CFR, IMR, Microvascular Flow जैसे उन्नत पैरामीटर्स को मापकर उन स्थितियों में भी स्पष्ट निदान देती है जहाँ पारंपरिक जांचें सीमित हो जाती हैं।
भोपाल बना अत्याधुनिक कार्डियक डायग्नोस्टिक्स का नया राष्ट्रीय केंद्र
इस इंस्टॉलेशन के बाद भोपाल अब देश में उन्नत हृदय जांच तकनीकों का प्रमुख केंद्र बन गया है। यह कदम भारतीय कार्डियोलॉजी में एक महत्वपूर्ण तकनीकी क्रांति के रूप में देखा जा रहा है।
