सिराली नगर परिषद में भ्रष्टाचार की परतें खुलीं, पार्षद बने जनसमस्याओं की आवाज – कार्रवाई न होने पर अधिकारियों पर उठ रहे सवाल

भोपाल हेडलाइंस सिराली संवाददाता संजय योगी की खबर

 सिराली/सिराली नगर परिषद इन दिनों प्रदेशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। कारण—अध्यक्ष पर लगे गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की फर्जी नियुक्तियाँ, गौशाला प्रबंधन में अनियमितताएँ और अधिकारियों द्वारा कार्रवाई से लगातार बचना। स्थिति यह है कि नगर परिषद में अविश्वास प्रस्ताव से लेकर पीआईसी भंग होने तक की घटनाओं ने पूरे प्रकरण को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर बेहद संवेदनशील बना दिया है।सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ है कि आखिर नगर परिषद में ऐसा कौन-सा संरक्षण प्राप्त है कि लगातार उजागर हो रहे मामलों पर न तो जांच आगे बढ़ रही और न ही किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई की जा रही है।

दैनिक वेतनभोगियों के नाम पर भ्रष्टाचार का बड़ा खेल?

सूत्रों के अनुसार, पार्षद राहुल शाह द्वारा सूचना के अधिकार के तहत निकाले गए दस्तावेज गंभीर सवाल खड़े करते हैं। आरोप है कि लगभग तीन से चार ऐसे लोग दैनिक वेतनभोगी के रूप में दर्ज हैं, जिनका नगर परिषद के किसी वास्तविक कार्य से कोई लेना-देना नहीं है। बताया जाता है कि ये लोग अध्यक्ष के पति के साथ घूमने, घर-दुकान से जुड़े निजी कार्यों और खेतों के काम में लगे रहते हैं, जबकि इनके वेतन का भुगतान नगर परिषद के सरकारी कोष से किया जा रहा है।

यह आरोप प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा प्रश्नचिह्न खड़ा करते हैं कि आखिर बिना वास्तविक कार्य लिए किसी को वेतन कैसे जारी हो रहा है? और यदि फर्जी नियुक्तियां हैं, तो यह किस स्तर की मिलीभगत से संभव हुआ?

गौशाला में भी बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार के संकेत

पार्षद राहुल शाह ने मीडिया के समक्ष खुलकर आरोप लगाए कि नगर परिषद द्वारा संचालित गौशाला में भी भारी अनियमितताएँ की जा रही हैं। फंड जारी होते हैं, लेकिन जमीन पर व्यवस्थाएँ नहीं दिखतीं। गौशाला की स्थिति और खर्चों पर कोई पारदर्शी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही।