समाजसेवी डॉ. लक्ष्मी मीणा एवं प्रतिज्ञा फाउंडेशन की विशेष पहल — विकलांग बाल आश्रम में उम्मीद का उजाला
समाजसेवी डॉ. लक्ष्मी मीणा एवं प्रतिज्ञा फाउंडेशन की विशेष पहल — विकलांग बाल आश्रम में उम्मीद का उजाला
संतोष योगी की खबर
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भोपाल। समाज की प्रगति का सही मापदंड यह है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों के जीवन में कितना प्रकाश भर पाता है। इसी उद्देश्य के साथ समाजसेवी डॉ. लक्ष्मी मीणा और प्रतिज्ञा फाउंडेशन की टीम ने सेवा भारती प्रकल्प, गांधीनगर (भोपाल) स्थित विकलांग बाल आश्रम का दौरा किया। यह केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से भरा वह क्षण था, जिसने बच्चों के साथ-साथ टीम के सदस्यों के हृदय को भी गहराई से छुआ।
मासूम मुस्कानों के बीच संवाद की एक अनोखी सुबह
आश्रम में विशेष आवश्यकता वाले किशोर लड़कों ने टीम का मुस्कुराहटों से स्वागत किया।
टीम ने बच्चों से उनकी दिनचर्या, पढ़ाई, संगीत और खेल गतिविधियों के बारे में विस्तार से बातचीत की। एक बच्चे ने बताया—
“मुझे सुबह भजन सुनना बहुत अच्छा लगता है, इससे मन शांत होता है।”
दूसरे ने मुस्कुराते हुए कहा—
“मैं ढोलक बजाना सीख रहा हूँ… गुरुजी कहते हैं कि मैं अच्छा सीख रहा हूँ।”
पढ़ाई के प्रति बच्चों की उत्सुकता देखते ही बनती थी। कई बच्चे कंप्यूटर सीखने की इच्छा रखते हैं, जबकि कुछ कविता और कहानियों में विशेष रुचि दिखाते हैं। खेल-कूद की सीमित क्षमताओं के बावजूद उनमें जो ऊर्जा और जज्बा दिखाई देता है, वह प्रेरणादायक है।
स्वल्प आहार वितरण और भावनात्मक क्षण
प्रतिज्ञा फाउंडेशन द्वारा बच्चों को स्वल्प आहार प्रदान किया गया। यह केवल भोजन नहीं, बल्कि स्नेह और सम्मान का प्रतीक था। बच्चों का “धन्यवाद” कहना टीम के लिए भावनात्मक क्षण था। यह स्पष्ट था कि उन्हें प्रेम और अपनापन सबसे अधिक सुख देता है।
कैमरे में कैद हुई आशा की दुनिया
फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से बच्चों की मुस्कुराहटों और प्रतिभा को समाज तक पहुँचाने का प्रयास किया गया। डॉ. लक्ष्मी मीणा ने कहा—
“इन बच्चों में असीम संभावनाएँ हैं। बस हमें इन्हें प्रोत्साहन, समय और सही संसाधन देने होंगे।”
आश्रम की आवश्यकताएँ और समाज का उत्तरदायित्व
संवाद के दौरान यह भी सामने आया कि आश्रम को व्हीलचेयर, शैक्षणिक सामग्री, फिजियोथेरेपी सुविधा और स्वयंसेवकों की अत्यंत आवश्यकता है। यह आवश्यकताएँ इस बात का संकेत हैं कि समाज यदि थोड़ा-सा सहयोग दे, तो इन बच्चों का जीवन कहीं अधिक उज्ज्वल हो सकता है।
सेवा का सार—हृदय को जोड़ने वाली कड़ी
प्रतिज्ञा फाउंडेशन और डॉ. मीणा का स्पष्ट संदेश है—
“सेवा वस्तुओं का नहीं, भावना का दान है। बच्चों के साथ समय बिताना भी सबसे बड़ा सहयोग है।”
अंत में—समाज के लिए एक प्रेरणा
इस विशेष दौरे ने एक ही सीख दी—
इन बच्चों की मुस्कान हमारी जिम्मेदारी भी है और हमारा सौभाग्य भी।
समाज से अपील है कि वह आगे आए, इन बच्चों का हाथ थामे और उनके भविष्य की रोशनी में अपना योगदान दे।
