IAS संतोष वर्मा की विवादित टिप्पणी पर उफना ब्राह्मण समाज, राजनीतिक मौन पर उठे सवाल—कांग्रेस में बेबाकी से हेमंत कटारे ने भरा खालीपन

 

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भोपाल।

आई ए एस संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण समाज को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद प्रदेशभर का ब्राह्मण समाज आक्रोशित है। धार्मिक और सामाजिक अस्मिता पर चोट माने जा रहे इस बयान ने जहाँ सामान्य जनमानस में नाराज़गी पैदा की है, वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे पर चुप्पी कई सवाल खड़ी कर रही है।

 

ब्राह्मण संगठनों का कहना है कि “ये केवल एक टिप्पणी नहीं, बल्कि पूरे समाज का अपमान है।” विभिन्न जिलों में बैठकों, ज्ञापनों और विरोध कार्यक्रमों की तैयारी तेज़ हो गई है। समाज के प्रमुख पदाधिकारियों का मानना है कि इस घटना ने ब्राह्मण समाज की उपेक्षा के उस पुराने दर्द को फिर उभार दिया है, जिसे लंबे समय से नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है।

 

*भाजपा नेताओं की खामोशी चर्चा का विषय*

 

राजनीतिक मंचों पर प्रदेश के बड़े ब्राह्मण चेहरे माने जाने वाले नेता—

डॉ. नरोत्तम मिश्रा, वी.डी. शर्मा, हितानंद शर्मा, गोपाल भार्गव सहित कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा अब तक कोई कठोर प्रतिक्रिया न देने को लेकर समाज में निराशा का भाव है।

कई ब्राह्मण संगठनों का कहना है कि राजनीतिक नेतृत्व का यह मौन उस समय और खटकने लगता है जब समाज पर प्रत्यक्ष चोट करने वाली घटनाओं पर भी केवल “राजनीतिक सुविधा” को प्राथमिकता दी जाती है।

*कांग्रेस में भी खानापूर्ति प्रतिक्रिया—लेकिन एक नाम उदय हो रहा है*

कांग्रेस पक्ष में भी स्थिति बहुत अलग नहीं दिखी। अधिकतर ब्राह्मण नेताओं ने औपचारिकता निभाते हुए एक-दो लाइन के ट्वीट कर अपनी जिम्मेदारी खत्म मान ली। समाज की भावनाओं के अनुसार जो दृढ़ प्रतिक्रिया अपेक्षित थी, वह दिखाई नहीं दी।

ऐसे समय में कांग्रेस के युवा और तेजतर्रार नेता हेमंत कटारे की बेबाक प्रतिक्रिया पार्टी के अंदर एक अलग ही संदेश दे रही है।

कटारे ने न केवल संतोष वर्मा की टिप्पणी की कठोर निंदा की, बल्कि स्पष्ट शब्दों में कहा कि “ब्राह्मण समाज का अपमान किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जाएगा।”

उनकी यह खुली और निर्विवाद प्रतिक्रिया समाज में सकारात्मक तौर पर देखी जा रही है।

राजनीति के जानकार मानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस में प्रभावी ब्राह्मण नेतृत्व की कमी साफ दिखाई दे रही थी। ऐसे में यही खालीपन अब हेमंत कटारे भरते हुए नजर आ रहे हैं। उनकी साफ-सुथरी, मुखर और निर्भीक राजनीति उन्हें ब्राह्मण समाज के उभरते हुए प्रमुख चेहरों में शामिल कर रही है।