केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा नाम में परिवर्तन करने एवं उसमें संशोधन के विरोध में राष्ट्रपति के नाम महू में तहसीलदार को ज्ञापन सोपा
*केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा नाम में परिवर्तन करने एवं उसमें संशोधन के विरोध में राष्ट्रपति के नाम महू में तहसीलदार को ज्ञापन सोपा*
संतोष योगी की खबर
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महू-इंदौर- जिला कांग्रेस प्रवक्ता जुगनू जादवसिंह धनावत ने बताया सिमरोल ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अशोक सैनी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा नाम में परिवर्तन करने एवं उसमें संशोधन के विरोध में राष्ट्रपति के नाम महू में तहसीलदार को ज्ञापन सोपा और कहा
हम देश-भर के मनरेगा मज़दूर, श्रमिक संगठन और ग्रामीण नागरिक VB-G RAM G कानून, 2025 का कड़ा विरोध करते हैं। मनरेगा, 2005 एक कानूनी, मांग-आधारित और विकेंद्रीकृत अधिकार है, जिसने करोड़ों ग्रामीण परिवारों-विशेषकर महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और भूमिहीन मज़दूरों को आजीविका की सुरक्षा देता था।
VB-G RAM G कानून इस अधिकार को समाप्त कर मनरेगा को बजट-नियंत्रित "योजना" में बदल देता है। काम, बजट और प्राथमिकताएँ केन्द्र से तय होंगी यानी पहले बजट, फिर काम, जो मनरेगा की आत्मा पर सीधा हमला है। 60:40 लागत-साझेदारी से राज्यों पर बोड़ा डालकर गरीब राज्यों में काम ठप होगा, बेरोज़गारी और पलायन बढ़ेगा। कृषि मौसम में 60 दिन काम पर रोक, तथा बायोमेट्रिक-डिजिटल नियंत्रण, मज़दूरों के अधिकारों और 73वें संविधान संशोधन के तहत स्थानीय स्वशासन को कमजोर करते हैं।
यह विधेयक बिना मज़दूरों, ग्राम सभाओं और श्रमिक संगठनों से परामर्श के लाया गया है। हमें न कानून का नाम बदलना चाहिए, न अधिकार।
अतः हमारी प्रमुख माँगें हैं-
1. VB-G RAM G बिल, 2025 को तुरंत वापस लिया जाए।
2. मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में पूरी तरह पुनः लागू किया जाए।
3.मनरेगा में काम के दिन बढ़ाये जाये व 800 रुपये न्यूनतम मज़दूरी तय किया जाए। इस अवसर पर मुख्य रूप से अशोक सैनी, दिनेश सल्वाडिया, नारायण शारदिया, राकेश पाटीदार, शेखर देवड़ा, पप्पू शारदीया, कमलेश राठौर, पंकज देशवाल, परवेज खान, कैलाश, प्रदीप इत्यादि कांग्रेस उपस्थित उपस्थित रहे
