शब्द, विचार और कला का उत्सव: भोपाल लिट्रेचर एंड आर्ट फेस्टिवल का भव्य आगाज़ पीयूष मिश्रा का दिखा बेबाक अंदाज़, राघव चंद्रा बोले—युवा ही हमारी सांस्कृतिक विरासत के भविष्यवाहक
शब्द, विचार और कला का उत्सव: भोपाल लिट्रेचर एंड आर्ट फेस्टिवल का भव्य आगाज़
पीयूष मिश्रा का दिखा बेबाक अंदाज़, राघव चंद्रा बोले—युवा ही हमारी सांस्कृतिक विरासत के भविष्यवाहक
संतोष योगी की खबर 99932 68143
भोपाल। झीलों की नगरी भोपाल में शुक्रवार को शब्द, विचार और कला का जीवंत संगम देखने को मिला, जब भारत भवन में भोपाल लिट्रेचर एंड आर्ट फेस्टिवल (बीएलएफ) के आठवें संस्करण का शुभारंभ हुआ। तीन दिनों तक चलने वाले इस साहित्यिक महाकुंभ में 60 से अधिक सत्रों के माध्यम से 100 से अधिक लेखक, विचारक और कलाकार समकालीन मुद्दों, रचनात्मकता और सांस्कृतिक विमर्श पर संवाद करेंगे।
उद्घाटन सत्र अंतरंग सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें साहित्य अकादमी सम्मानित गोविंद मिश्र मुख्य अतिथि रहे। सेज समूह के चेयरमैन संजीव अग्रवाल और भारत भवन न्यास के चेयरमैन वामन केन्द्रे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। फेस्टिवल के फाउंडर डायरेक्टर राघव चंद्रा और को-फाउंडर अभिलाष खांडेकर ने अतिथियों का स्वागत कर फेस्टिवल की परिकल्पना साझा की।
गणेश वंदना से शुभारंभ, श्रद्धांजलि अर्पित
कार्यक्रम की शुरुआत कथक नृत्यांगना मीरल उपरित की भावपूर्ण गणेशवंदना से हुई। इसके बाद डीपीएस स्कूल की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। समारोह में दिवंगत साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल और उतरा पारिक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
युवा ही सांस्कृतिक विरासत के भविष्यवाहक
राघव चंद्रा ने कहा कि साहित्य बदलती वैश्विक परिस्थितियों में मानव जीवन को दिशा देता है। इस वर्ष पहली बार ओपन क्विज प्रतियोगिता, देश के दस राज्यों से आए 60 से अधिक जनजातीय कलाकारों का कला शिविर और भारत भवन दीर्घा में पद्मश्री दुर्गा बाई व्याम के चित्रों की विशेष प्रदर्शनी फेस्टिवल का आकर्षण है। वामन केन्द्रे ने युवाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि युवा ही हमारी सांस्कृतिक विरासत के भविष्यवाहक हैं। गोविंद मिश्र ने साहित्य को निरंतर बेहतर की तलाश बताते हुए कहा कि आज ‘लिट्रेचर’ जीवन के हर पक्ष से संवाद कर रहा है।
पीयूष मिश्रा: ‘तुम्हारी क्या औकात है’—आत्ममंथन का दस्तावेज़
पहले दिन का सबसे बड़ा आकर्षण रहे अभिनेता, कवि और रंगकर्मी पीयूष मिश्रा। उनकी पुस्तक ‘तुम्हारी क्या औकात है’ पर केंद्रित सत्र में उन्होंने बेबाकी से आत्मसंघर्ष, अध्यात्म और रचनात्मक प्रक्रिया पर बात की। सत्र का संचालन डॉ. रितु पांडे शर्मा ने किया। पीयूष मिश्रा ने कहा कि ‘औकात’ अपमान नहीं, बल्कि स्वयं से पूछे जाने वाले प्रश्न का प्रतीक है। उन्होंने विपश्यना से जुड़े अनुभव, 2009 के ब्रेन स्ट्रोक और जीवन में आए बदलाव साझा किए। पुस्तक के अंश और कविताओं पर श्रोताओं ने लंबे तालियों से सराहना की।
‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’: सिनेमा, संगीत और संवेदना
शाम को फौजिया दास्तांगो और उनके समूह ने ‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’ की संगीतमय प्रस्तुति से दर्शकों को गुरु दत्त के जीवन और संघर्ष से रूबरू कराया। लतिका जैन द्वारा प्रस्तुत गीतों ने सभागार को भावनात्मक स्मृतियों से भर दिया।
‘डिकोडिंग विकसित भारत’: जेन जी समर्पित और जागरूक
‘डिकोडिंग विकसित भारत’ सत्र में तुहीन सिन्हा ने कहा कि विकसित भारत का सीधा संबंध सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र से है। उन्होंने जेन जी को इस परिकल्पना का आधार बताया। आदित्य पिट्टी ने कहा कि विकसित भारत किसी एक दल की नहीं, बल्कि पूरे देश की साझा आकांक्षा है।
विविध सत्रों में व्यापक विमर्श
फेस्टिवल के पहले दिन दुष्यंत कुमार के साहित्य अवदान, राजस्थान की जनजातीय परंपराएं, महानगरों में स्त्री-कथाएं, जयदेव का गीत गोविंद, व्यंग्य और यथार्थ, डेटा गोपनीयता, भारतीय सांस्कृतिक प्रभाव, गांधी दर्शन, थ्रिलर लेखन और आधुनिक दलित इतिहास जैसे विषयों पर विचारोत्तेजक सत्र आयोजित हुए।
भोपाल लिट्रेचर एंड आर्ट फेस्टिवल का यह शुभारंभ साहित्य, कला और विचार के उत्सव के रूप में शहर को तीन दिनों तक संवाद और सृजन की ऊर्जा से भर देगा।
