नर्मदापुरम: अतिक्रमण हटाओ मुहिम में 'भेदभाव' का बोलबाला; गरीबों की रोजी-रोटी पर प्रहार, रसूखदारों को अभयदान!

 

संतोष योगी की खबर 99932 68143

 

नर्मदापुरम। शहर में इन दिनों नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने के नाम पर की जा रही कार्रवाई विवादों के घेरे में है। प्रशासन का पूरा जोर उन गरीब रेहड़ी-पटरी वालों पर है, जो हाथ ठेलों के जरिए अपनी दैनिक रोजी-रोटी कमाते हैं। विडंबना यह है कि जहाँ छोटे व्यापारियों के ठेलों को जब्त किया जा रहा है, वहीं शहर के रसूखदारों द्वारा किए गए 'पक्के' और 'बड़े' अतिक्रमणों पर अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।

चुनिंदा कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

शहर के प्रमुख क्षेत्रों जैसे नर्मदा महाविद्यालय, एसएनजी स्कूल, नेहरू पार्क, गांधी पार्क और इतवारा बाजार में अतिक्रमण के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं। विशेषकर सराफा चौक और ऐतिहासिक सेठानी घाट की ओर जाने वाले मार्गों पर अतिक्रमण की स्थिति विकराल है, लेकिन यहाँ प्रशासन की सख्ती नजर नहीं आती।

गुप्ता ग्राउंड के पीछे का मामला बना चर्चा का विषय

ताजा मामला गुप्ता ग्राउंड के पीछे नगर पालिका की बेशकीमती भूमि का है। आरोप है कि यहाँ लोगों ने घरों के सामने अवैध रूप से गार्डन और अन्य निर्माण कर सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बना लिया है। सूत्रों के अनुसार, कुछ दिनों पहले दस्ता कार्रवाई करने पहुँचा तो था, लेकिन 'भारी लेन-देन' और सांठ-गांठ के चलते बिना किसी कार्रवाई के वापस लौट आया। यह घटना प्रशासन की कार्यप्रणाली और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

गरीबों पर गाज, अमीरों को राहत क्यों?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जो गरीब सुबह ठेला लगाकर शाम को घर चले जाते हैं, उनसे सड़क को उतनी समस्या नहीं है जितनी उन स्थायी निर्माणों से है जो सालों से जमे हुए हैं। जनता पूछ रही है कि:

 * क्या नगर पालिका के नियम केवल गरीबों के लिए हैं?

 * रसूखदारों के अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने में प्रशासन क्यों हिचकिचा रहा है?

 * क्या भ्रष्टाचार के कारण शहर के विकास और व्यवस्था की बलि चढ़ाई जा रही है?

निष्कर्ष: यदि प्रशासन वास्तव में शहर को व्यवस्थित करना चाहता है, तो उसे निष्पक्षता दिखानी होगी। अतिक्रमण हटाने की शुरुआत उन बड़े अवैध निर्माणों से होनी चाहिए जो शहर के यातायात और सौंदर्य में बाधक हैं, न कि उन गरीबों से जिनका चूल्हा ही इन ठेलों से जलता है।