सुरों की साधना, भावनाओं का उत्सव: ‘सुर संदेश’ की सुरमई गीतों की महफ़िल ने बाँधा समा
सुरों की साधना, भावनाओं का उत्सव: ‘सुर संदेश’ की सुरमई गीतों की महफ़िल ने बाँधा समा
संतोष योगी की खबर 99932 68143
भोपाल।
संगीत जब दिलों को जोड़ता है, तब मंच परिवार बन जाता है—इस कथन को साकार किया भोपाल के प्रसिद्ध संगीत मंच ‘सुर संदेश कराओके म्यूजिकल ग्रुप’ ने। फूडक्राफ्ट रेस्टोरेंट में आयोजित “सुरमई गीतों की महफ़िल” न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा, बल्कि सुरों, भावनाओं और आपसी सहयोग का उत्सव बनकर उभरा।
कार्यक्रम का शुभारंभ आयोजक श्री संदेश घुसे (संदेश सुल्ले), टीम सदस्यों एवं कलाकारों द्वारा भगवान श्री गणेश एवं माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पित कर दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके पश्चात गणेश वंदना और सरस्वती वंदना के साथ सुरों की शानदार यात्रा शुरू हुई।
महफ़िल में आदेश जी, जुगादे जी, अभिताभ जी, अविनाश जी, अमित जी, रवि मालवीय जी, मनीष जी, राजपूत जी, मुकेश चौधरी जी, मुकेश बाहर जी, समीर काले जी, श्रोती जी, रविशंकर जी, मनोज जी, अभिजीत जी, पिल्लई सर जी, राजेश जी, माईका मौरख जी, रणदिवे जी, प्रकाश जी, अतुल श्री, श्रीमती शशिकला जी, सुमन जी, नंदा जी, ममता जी, सुगंधा जी, सुनीता जी, वसुंधरा जी, साधना जी, संध्या जी, मीना जी, राम जी, सुनंदा जी, साक्षी जी सहित अनेक गायक–गायिकाओं ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विशेष आकर्षण के रूप में आकाशवाणी मंच की कलाकार शिवांगी पवार ताई ने भी सुरीले गीतों से समां बाँधा।
हर प्रस्तुति में मेहनत, हर ताल में आत्मीयता और हर सुर में सच्ची भावना झलकती रही। कलाकारों ने एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाते हुए यह संदेश दिया कि संगीत प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग और सृजन का माध्यम है।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजक श्री संदेश द्वारा गाया गया गीत “मैं जट्ट यमला पगला” और रवि मालवीय जी की गायकी ने पूरे मंच को नृत्य के लिए प्रेरित कर दिया। अंत में श्री अनुम जी एवं रणदिवे जी द्वारा प्रथम बार पधारे 20 गायकों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।
कुल मिलाकर, ‘सुर संदेश’ की यह संध्या साबित कर गई कि उम्र, पेशा या पहचान नहीं—जज़्बा और समर्पण ही सच्चे कलाकार की पहचान होते हैं। यह आयोजन न सिर्फ़ एक कार्यक्रम, बल्कि संगीत प्रेमियों के लिए एक प्रेरणा बनकर
यादगार रहा।
