ट्रेड आरक्षकों के संविलियन की मांग को लेकर महाकाल दरबार में गुहार
ट्रेड आरक्षकों के संविलियन की मांग को लेकर महाकाल दरबार में गुहार
संतोष योगी की खबर 99932 68143
उज्जैन।
मध्यप्रदेश पुलिस के ट्रेड आरक्षकों के सामाजिक एवं मानसिक हितों को लेकर एक महत्वपूर्ण विषय सामने आया है। ट्रेड आरक्षकों एवं उनके परिवारजनों ने उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर बाबा के दरबार में आवेदन प्रस्तुत कर ट्रेड आर. से जी.डी. आरक्षक में संविलियन प्रक्रिया पुनः प्रारंभ कराने की मांग की है।
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि शासन के आदेश क्रमांक जी.ओ.पी. 57/93 के अंतर्गत ट्रेड आरक्षकों का जी.डी. आरक्षक में संविलियन पूर्व में प्रारंभ था, जिसे पुनः लागू करने की आवश्यकता है। इस संबंध में शासन-प्रशासन एवं मुख्यमंत्री से भी हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई गई है।
आवेदन में ट्रेड आरक्षकों से जुड़ी कई समस्याओं को बिंदुवार रखा गया है। बताया गया कि पदोन्नति के उपरांत भी ट्रेड आरक्षकों को जनरल ड्यूटी में सम्मिलित नहीं किया जा रहा, जबकि वे गार्ड ड्यूटी, रोज़नामचा, आम्र्स शाखा, क्वार्टर मास्टर शाखा सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए पूर्णतः योग्य हैं। इसके बावजूद उनका अनुभव और क्षमता कानूनी व्यवस्था में उपयोग नहीं हो पा रही है।
आवेदन में यह भी कहा गया कि यह कार्य अपेक्षाकृत कम वेतन पर संविदा या आउटसोर्स के माध्यम से कराया जा रहा है, जबकि ट्रेड आरक्षकों को शामिल करने से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और प्रदेश की कानून व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि ट्रेड आरक्षकों और जी.डी. आरक्षकों का वेतनमान एवं ग्रेड-पे समान (5200-20200, ग्रेड पे 1900) है, जिससे शासन पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा।
अन्य बिंदुओं में बताया गया कि मध्यप्रदेश पुलिस में ट्रेड आरक्षकों को प्रमोशन के बाद भी कार्यक्षेत्र में परिवर्तन नहीं मिलता, जबकि अन्य विभागों में ऐसा नहीं है। इसके अलावा ट्रेड आरक्षकों को न तो पुलिस विभाग के किसी कोर्स में जाने की पात्रता है और न ही अन्य ट्रेड में परिवर्तन की प्रक्रिया चालू है। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि मध्यप्रदेश को छोड़कर देश के अधिकांश राज्यों में ट्रेड संविलियन की प्रक्रिया लागू है।
अंत में समस्त ट्रेड आरक्षक परिवारजनों ने विनम्र निवेदन किया है कि इन समस्याओं के समाधान हेतु संविलियन प्रक्रिया को पुनः प्रारंभ किया जाए। आवेदन के साथ मुख्यमंत्री एवं डीजीपी को पूर्व में दिए गए पत्र भी संलग्न किए गए हैं।
