पलासनेर भ्रष्टाचार प्रकरण ने पकड़ा तूल, निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े ग्रामीण
पलासनेर भ्रष्टाचार प्रकरण ने पकड़ा तूल, निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े ग्रामीण
भोपाल हेडलाइंस
हरदा। जनपद पंचायत हरदा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पलासनेर में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पंचायत में हुए घटिया निर्माण कार्यों और शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग की आवाज उठाने वाले ग्रामीणों व दो पत्रकारों के विरुद्ध सरपंच पक्ष द्वारा की गई शिकायत को ग्रामीणों ने 'दुर्भावनापूर्ण' करार दिया है।
मंगलवार को ग्राम पलासनेर के जागरूक नागरिकों ने जनसुनवाई में कलेक्टर को एक शिकायती आवेदन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
ग्रामीणों नारायण सिंह चौहान, अजय मिश्रा, भूपेंद्र बिश्नोई, यासीन खान,विनोद सांगोले समेत अनेक ग्रामीण का आरोप है कि सरपंच श्रीमती सरोज चौरसिया द्वारा पंचायत में शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जब ग्रामीणों ने इन अनियमितताओं के विरुद्ध आवाज उठाई और जिला स्तर व कमिश्नर कार्यालय में शिकायत की, तो दबाव बनाने के उद्देश्य से पूर्व में भी ग्रामीणों की झूठी शिकायत की थी। सरपँच द्वारा अभी तक साक्ष्य नहीं प्रस्तुत किये।
राशि का निजी खातों में हस्तांतरण:
ग्रामीणों का आरोप है कि शासकीय राशि को नियमों के विरुद्ध सरपंच के पुत्र सचिन चौरसिया के निजी खाते में डाला गया है, जो सीधे तौर पर गबन की श्रेणी में आता है। इसी तरह ग्रामीणों का आरोप है कि फर्जी जॉब कार्ड जारी कर अनेको लोगों के बैंक खाते में सरकारी राशि आहरित की गई जो जांच का विषय है। हालांकि, ग्राम पंचायत पलासनेर में दो से तीन बार जांच टीम पहुंची, लेकिन अभी तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
मनरेगा में मशीन का उपयोग:
ग्रामीणों ने कहा कि मनरेगा के तहत होने वाले तालाब खुदाई के कार्य में मजदूरों के हक पर डाका डालते हुए, रात्रि के समय जेसीबी मशीन से कार्य कराया गया। ग्रामीणों के पास इसके पुख्ता वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं।उन्होंने कहा कि हमने शिकायत के बाद पंचायत के जिम्मेदारो ने कागजो पर बने तलाबों को जेसीबी से खुदवाया गया। जिसके ग्रामीणों के पास साक्ष्य है।
घटिया निर्माण कार्य-
वाटर हार्वेस्टिंग शासन के तकनीकी मापदंडों को ताक पर रखकर खानापूर्ति की गई। वही,स्टॉप डैम निर्माण इतना घटिया है कि डैम में बड़ा छेद (होल) साफ देखा जा सकता है, जिससे जल भराव संभव नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार प्राकृतिक नाला पर स्टाप डैम बनाया गया। जिसमें फर्जी मजदूर दर्शाकर शासन की राशि का दुरुपयोग किया गया।इसी तरह ग्राम के शंकर मंदिर मार्ग से सीसी सड़के की गुणवत्ता इतनी खराब है कि वह उखड़ने के बाद सड़क से धूल उड़ रही है।
कर्मचारियों पर दबाव-
ग्रामीणों के आरोप है कि सरपंच द्वारा पंचायत सचिव पर अनुचित दबाव बनाकर नियम विरुद्ध कार्य कराए गए और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इसकी जांच कर सम्बंधित पर करवाई की जाए।
प्रतिष्ठा धूमिल करने की साजिश
कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में आवेदकों ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने सचिव के साथ किसी भी प्रकार की अभद्रता या प्रताड़ना नहीं की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब हमने भ्रष्टाचार के साक्ष्य जुटाकर जिला प्रशासन और कमिश्नर नर्मदापुरम को सौंपे, तो सरपंच पक्ष ने खुद को बचाने और हमें डराने के लिए झूठी शिकायत का सहारा लिया है। यह हमारी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने की कोशिश है।
प्रशासन से मांग-
ग्रामीणों ने डीएम महोदय से मांग की है कि उनके विरुद्ध की गई शिकायत की निष्पक्ष और जमीनी स्तर पर जांच की जाए। इधर, मीडिया के सामने उप सरपंच अजय मिश्रा ने ग्राम पंचायत में सोशल आडिट को लेकर सवाल खड़े कर दिए। एक तरफ पत्रकार सच्चाई दिखा रहे हैं। दूसरी और अखिलेश बिल्लौरे पत्रकार से सोशल ऑडिट कर भ्रष्टाचार को दबाया जा रहा है। मिश्रा का कहना है कि दो पत्रकार पैसे मांगने व ग्रामीणों पर ग्राम पंचायत की सरपंच ने सचिव की मौत पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जो आरोप लग रहे है वह गलत है। उन्होंने कहा कि जिस दिन जाच टीम आई। उस दिन कोई ग्रामीण मौजूद ना ही पत्रकार मौजूद थे। मिश्रा ने मीडिया से चर्चा के दौरान ऑडियो रिकार्डिंग भी सुनाई है जिसमे सरपँच व उपसरपंच भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा हो रही है।उन्होंने यह ऑडियो रिकॉर्डिंग कलेक्टर के सामने भी पेश की है।मिश्रा ने मांग की है कि प्रशासन जल्द ही संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने बताया कि भ्रष्टाचार के साक्ष्यों फोटो वीडियो के आधार पर सरपंच और संबंधित दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए। झूठी शिकायत कर प्रशासन को गुमराह करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई हो। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन भ्रष्टाचार के इन पुख्ता साक्ष्यों पर क्या संज्ञान लेता है और ग्रामीणों की झूठी शिकायतों से कब तक न्याय मिलता है।
*जिम्मेदार अधिकारियों का कथन-*
हमारे पास सचिव सहायक सचिव संघ और पत्रकारों के ज्ञापन आए हैं। मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जा
एगी।
*सिद्धार्थ जैन जिला कलेक्टर हरदा*
