भागवत कथा के समापन पर खेड़ापति माता मंदिर में भव्य भंडारा, कृष्ण–लीलाओं से भावविभोर हुए श्रद्धालु 

 संबाददाता राहुल पवार योगी भोपाल हैडलाइनस

मो. 9770763164

 

रहटगांव।

ग्राम खेड़ापति माता मंदिर परिसर में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का रविवार को भक्तिमय वातावरण में समापन हुआ। समापन अवसर पर खेड़ापति माता मंदिर समिति एवं समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी सज्जन, ग्रामवासी, माताएं एवं बहनें शामिल हुईं और मां भवानी का प्रसाद ग्रहण किया।

आयोजन समिति के अनुसार सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के सफल समापन पर सेवा भावना के तहत यह भंडारा आयोजित किया गया। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

इससे पूर्व श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन कथावाचक पं. अभिषेक शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कंस वध की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के हाथों कंस को मोक्ष की प्राप्ति हुई, क्योंकि ईश्वर के हाथों मृत्यु पाने वाला जीव सीधे मोक्ष को प्राप्त करता है। कथा में चाणूर और मुष्टिक वध के प्रसंगों का भी विस्तार से वर्णन किया गया।

कथावाचक ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने कंस को सिंहासन से उठाकर भूमि पर पटक दिया और उसके हृदय पर प्रहार कर उसका अंत किया। उस समय भगवान श्रीकृष्ण की आयु मात्र 14 से 16 वर्ष के बीच थी। इसके पश्चात रुक्मिणी विवाह की मंगल कथा का वर्णन किया गया, जिसमें विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को मन ही मन पति रूप में स्वीकार करने की कथा सुनाई गई।

बताया गया कि रुक्मिणी ने सुदेवा ब्राह्मण के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भिजवाया, जिसके बाद श्रीकृष्ण ने शिशुपाल के विवाह से पूर्व रुक्मिणी का हरण कर उनसे विवाह रचाया। कथा श्रवण के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भावविभोर नजर आए और अंत में आरती व प्रसादी का लाभ लिया।