गरिमामय वातावरण में मनाया गया दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट का फाउंडर्स डे (ओपन डे)
गरिमामय वातावरण में मनाया गया दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट का फाउंडर्स डे (ओपन डे)
संतोष योगी की खबर 99932 68143
भोपाल।दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीईआई) का फाउंडर्स डे (ओपन डे) इस वर्ष 31 जनवरी को डीईआई इंफॉर्मेशन सेंटर, चार इमली, भोपाल में गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में केंद्र प्रभारी श्रीमती कोमल कपूर जी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने डीईआई इंफॉर्मेशन सेंटर में संचालित विभिन्न शैक्षणिक एवं कौशल विकास गतिविधियों की जानकारी उपस्थित अतिथियों को दी।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती रचना सिंह द्वारा सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली ढंग से किया गया। इस अवसर पर कटिंग–सिलाई प्रशिक्षण पाठ्यक्रम की छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने कार्यों एवं सीखने के अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में शिक्षकगण, मेंटर्स तथा अन्य विशिष्ट अतिथि भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत डीईआई के संस्थापक निदेशक पूजनीय डॉ. मुकुंद बिहारी लाल साहब के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हुए की गई। वक्ताओं ने उनके दूरदर्शी नेतृत्व और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में निर्मित डीईआई शिक्षा नीति (1975) ने समग्र एवं मूल्य-आधारित शिक्षा की सशक्त नींव रखी। इस नीति के कई महत्वपूर्ण सिद्धांतों को बाद में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी सम्मिलित किया गया, जिससे डीईआई शिक्षा सुधारों में अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित हुआ।
ओपन डे के रूप में आयोजित इस आयोजन में संस्थान की शैक्षणिक, तकनीकी एवं सामाजिक उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। दिनभर चली व्यस्त गतिविधियों के माध्यम से यह बताया गया कि डीईआई किस प्रकार नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास एवं सामाजिक योगदान के क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रहा है। कटिंग–सिलाई प्रशिक्षण से जुड़ी छात्राओं की प्रस्तुतियों ने कौशल-आधारित शिक्षा की उपयोगिता को प्रभावी रूप से दर्शाया।
यह कार्यक्रम विद्यार्थियों, युवाओं एवं समाज के विभिन्न वर्गों को शिक्षा, तकनीक, उद्यमिता और सामुदायिक विकास से जोड़ने का सशक्त मंच सिद्ध हुआ। समापन अवसर पर अतिथियों ने डीईआई की शैक्षणिक दृष्टि एवं सामाजिक प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि फाउंडर्स डे केवल एक औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि समग्र शिक्षा के मूल्यों की पुनः पुष्टि एवं भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
