भोपाल में धूमधाम से मनाया गया पोंगल महोत्सव, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

संतोष योगी की खबर 9993268143

भोपाल। तमिल संगम भोपाल, कला केंद्र भोपाल, जीएम इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ स्कूल तथा दिल्ली कलाई इलक्किया पेरवई के संयुक्त तत्वावधान में पोंगल पर्व बड़े हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में समाज की महिलाओं और बच्चों ने समूह नृत्य, गायन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया।

पोंगल तमिलनाडु का प्रमुख चार दिवसीय फसल उत्सव है, जिसे प्रतिवर्ष जनवरी माह के मध्य में तमिल हिंदुओं द्वारा श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देव और प्रकृति को समर्पित होता है, जिसमें अच्छी फसल के लिए आभार व्यक्त किया जाता है। ‘पोंगल’ शब्द का अर्थ है ‘उबलना’, जो दूध और चावल से बने पारंपरिक मीठे व्यंजन का प्रतीक है, जिसे समृद्धि और खुशहाली के रूप में मनाया जाता है।

कार्यक्रम के दौरान पोंगल के चारों दिनों के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।

पहले दिन भोगी पोंगल में घरों की सफाई कर पुराने सामान त्यागने और नएपन का स्वागत करने की परंपरा निभाई जाती है।

दूसरे दिन थाई पोंगल, जो मुख्य पर्व होता है, में मिट्टी के बर्तन में दूध, गुड़ और नए चावल से पोंगल बनाकर सूर्य देव को अर्पित किया जाता है।

तीसरे दिन माटू पोंगल में कृषि कार्यों में सहायक पशुओं—गाय और बैल—की पूजा और सेवा की जाती है।

चौथे दिन कानूम पोंगल परिवारजनों और रिश्तेदारों से मिलने-जुलने तथा सांस्कृतिक आयोजनों का दिन होता है।

इस अवसर पर श्री मणिकंडन स्वामी (अपर आयुक्त, जीएसटी विभाग), श्री एस. चंद्रशेखर (अध्यक्ष, तमिल संगम), डॉ. शांता अय्यर (अध्यक्ष, कला केंद्र), डॉ. सुरेश कुमार (जीएम स्कूल), श्री बी. कुमार (दिल्ली कलाई इलक्किया पेरवई), श्री नीरज स्वामी जी (अध्यक्ष, मध्यप्रदेश तमिल संगम), श्री के. शंकर एवं श्री सुब्रमण्यम (महासचिव, मध्यप्रदेश तमिल संगम) सहित श्री हरिकृष्णन, श्री रामदास द्रविड़, श्री कार्तिक स्वामी एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम ने न केवल तमिल संस्कृति और परंपराओं को सजीव रूप में प्रस्तुत किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का भी सुंदर संदेश दिया।