यूजीसी कानून को लेकर टाइमलाइन, क्या समस्या, एम.पी. में क्यों लागू हुआ
यूजीसी कानून को लेकर टाइमलाइन, क्या समस्या, एम.पी. में क्यों लागू हुआ
संतोष योगी की खबर 99932 68143
भोपाल। यूजीसी कानून को लेकर 29 जनवरी को माननीय सर्वोच्य न्यायालय ने कानून के कुछ प्रावधानों को लेकर इस पर रोक लगा दी थी। मामले को लेकर दायर की गई सभी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 19 मार्च को सुनवाई करेगा। ऐसे में क्या श्रेय लेने की होड़ में या जातिगत दबाव के चलते मध्यप्रदेश सरकार ने 2 फरवरी 2026 को एक आदेश जारी किया। यूजीसी के नए प्रावधानों और नियमों को मानने के लिए सभी स्कूल कॉलेजो और यूनिवर्सिटीज को लेटर जारी किए गए। आखिर क्यों ? जब मामला न्यायलय में लंबित है, अगली तारीख लगी हुई ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद यूजीसी के नियमों को लागू करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य बना। सवाल ये है कि ये जल्दबाजी क्यों ? क्या ये मामला कोर्ट की अवमानना का नहीं कहा जा सकता ? या मध्यप्रदेश सरकार किसी अलग संविधान और कानून से चलती ? यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को नए नियम जारी किए थे। इसे 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026' नाम दिया गया। जिस पर सीजेआई सूर्यकांत और बागची की डबल बेंच की ओर से स्पष्ट किया कि नए नियमों का दुरुपयोग हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से सरकार और यूजीसी को नोटिस देने के साथ यूजीसी नियम-2026 पर रोक लगा दी गई है, जिस पर अलगी सुनवाई 19 मार्च को होनी है। फिर इस भेदभाव भरे विवादास्पद कानून को सबसे पहले मध्यप्रदेश में लागू करने के पीछे सरकार की क्या मंशा है ? यह सरकार को और सामान्य प्रशासन विभाग को स्पष्ट करना चाहिए।
(1) सुप्रीम कोर्ट में 3 याचिकाएं सुनवाई के लिए लगी थी, मृत्युंजय तिवारी, अधिवक्ता विनीत जिंदल, राहुल दीवान, संजय दीक्षित, रूबल पडलिया आदि याचिकाकर्ताओं में शामिल रहे।
(2) चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच द्वारा नए यूजीसी नियमों को लेकर सुनवाई की गई।-2
(3) याचिकाकर्ताओं की ओर से नए यूजीसी एक्ट को भेदभाव को खत्म करने की जगह और ज्यादा भेदभाव को बढ़ावा देने वाला बताया गया। इसे सामान्य वर्ग के साथ जातिगत भेदभाव को बढ़ाने वाला नियम कहा गया।
(4) सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत की ओर से एक सवाल किया गया कि अगर कोई दक्षिण भारत का छात्र किसी उत्तर भारत के कॉलेज में पढ़ने आता है और वहां कोई उसकी जाति न जानता हो तो क्या इस कानून से उसे भेदभाव से सुरक्षा देता है ?
(5) नए नियमों पर रोक लगाकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 2012 के यूजीसी नियम लागू रहेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
सीजेआई की ओर से कहा गया है कि अगर वो इस मामले में दखल नहीं देंगे तो समाज में विभाजन होगा और उसका नतीजा खतरनाक हो सकता है। फिलहाल अगली सुनवाई तक-2012 के यूजीसी के रेगुलेशन जारी रहेंगे। लेकिन मध्यप्रदेश में इसके उलट हो रहा है। आखिर किस दबाव में।
मध्यप्रदेश सर्वजन न्याय मंच के प्रदेश संयोजक वरिष्ठ कर्मचारी नेता अशोक पाण्डेय एवं अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष पंडित पुष्पेंद्र मिश्रा, श्री सुधीर नायक अध्यक्ष मंत्रालय अधिकारी कर्मचारी संघ ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि सरकार से हम मांग करते हैं कि सरकार ने 2 फरवरी-2026 को जो यूजीसी नियम लागू किए हैं, उसको सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम फैसला आने तक वापस लिया जाए यदि सात दिवस के अंदर सरकार 2 फरवरी 2026 को जारी किए गए यूजीसी नियमों को वापस नहीं लेगी तो मध्यप्रदेश सर्वजन न्याय मंच आंदोलन का रास्ता अपनाएगा तथा सर्वजन न्याय मंच यूजीसी विषय को लेकर न्याय के लिए सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ेगा ।
