पशुपालन विभाग के अधिकारियों का मन माना रबया पर कोर्ट की सख्ती: नोटिस के बावजूद पेश नहीं हुए, हाईकोर्ट ने ₹5 हजार के जमानती वारंट किए जारी
पशुपालन विभाग के अधिकारियों का मन माना रबया पर कोर्ट की सख्ती: नोटिस के बावजूद पेश नहीं हुए, हाईकोर्ट ने ₹5 हजार के जमानती वारंट किए जारी
पशुपालन एवं डेयरी विभाग, मध्य प्रदेश से एवीएफओ भर्ती में संशोधित परिणाम जारी करने की मांग
संतोष योगी की खबर 99932 68143
भोपाल। समूह-5 संयुक्त भर्ती परीक्षा वर्ष 2024 के अंतर्गत सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (एवीएफओ) पद हेतु संशोधित परिणाम एवं विस्तृत प्रतीक्षा सूची जारी करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने विभाग से शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ द्वारा याचिका क्रमांक डब्ल्यूपी-19468-2019 में पारित आदेश के अनुसार उक्त पद के लिए केवल पशुपालन विज्ञान में डिप्लोमा धारक अभ्यर्थी ही पात्र माने गए हैं तथा डिग्रीधारकों को अपात्र घोषित किए जाने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया से बाहर किया गया है, जिससे 191से अधिक पद रिक्त रह गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि नियम पुस्तिका के अध्याय-1, नियम क्रमांक-5 के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग हेतु 40 प्रतिशत तथा अनारक्षित वर्ग हेतु 50 प्रतिशत न्यूनतम अंक निर्धारित हैं, अतः निर्धारित अर्हता अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को सफल सूची अथवा विस्तृत प्रतीक्षा सूची में शामिल किया जाना अनिवार्य है। अभ्यर्थियों ने यह भी मांग की है कि न्यायालय के आदेश के अनुरूप समस्त रिक्त पद केवल डिप्लोमा धारक अभ्यर्थियों से मेधा क्रम के आधार पर भरे जाएं ताकि सभी स्वीकृत पद पूर्ण रूप से भरे जा सकें, साथ ही समान प्रतिशत प्राप्त अभ्यर्थियों के साथ अलग-अलग व्यवहार किए जाने पर चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
पशुपालन विभाग के अधिकारियों का मनमाना रवैया, कोर्ट की सख्ती
नोटिस जारी होने के बावजूद विभागीय अधिकारी न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए, जिस पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध 5 हजार रुपये के जमानती वारंट जारी किए हैं। न्यायालय की इस कार्रवाई को भर्ती प्रक्रिया में लापरवाही एवं आदेशों की अवहेलना के रूप में देखा जा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब रिक्त पदों की संख्या 191 से अधिक है और न्यायालय के स्पष्ट निर्देश मौजूद हैं, तब भी विभाग द्वारा संशोधित परिणाम एवं विस्तृत प्रतीक्षा सूची जारी न करना नियमसम्मत नहीं है, अतः न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप पारदर्शी एवं न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
