भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान द्वारा मृदा संरक्षण जागरूकता अभियान आयोजित “अपने खेत की मिट्टी को बचाएँ - सतत एवं खाद्य-सुरक्षित भविष्य के लिए” विषय पर किसानों को किया जागरूक
संतोष योगी की खबर 99932 68143
भोपाल। भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान द्वारा 20 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश के वर्धा गांव, जिला विदिशा में “अपने खेत की मिट्टी को बचाएँ - सतत एवं खाद्य-सुरक्षित भविष्य के लिए” विषय पर जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। अभियान का उद्देश्य किसानों को मृदा संरक्षण, संतुलित पोषक तत्व उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. मनोरंजन मोहंती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य एवं फसल उत्पादकता बनाए रखने के लिए रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक खाद के संतुलित उपयोग पर विशेष जोर दिया। साथ ही उन्होंने बाजार संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए गांवों में किसान समूह गठित करने की आवश्यकता बताई।
अभियान के दौरान “फार्मर फर्स्ट” परियोजना के वैज्ञानिकों ने किसानों से मिट्टी स्वास्थ्य, मिट्टी परीक्षण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, कम्पोस्ट निर्माण, बायो-फॉर्मूलेशंस तथा फसल विविधीकरण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संस्थान द्वारा विकसित “फैमिली नेट वेसल कम्पोस्ट यूनिट” एवं “डीकंपोजर कैप्सूल” तकनीक का प्रदर्शन रहा, जो जैविक कचरे के पुनर्चक्रण में उपयोगी है।
इस अवसर पर लगभग 100 किसानों को कम्पोस्टिंग यूनिट, डीकंपोजर कैप्सूल, लिक्विड बायो-फॉर्मुलेशंस एवं एनरिच्ड कम्पोस्ट के पैकेट वितरित किए गए।
उल्लेखनीय है कि वर्धा गांव एवं सांगुल गांव को संस्थान द्वारा “मध्य भारत में संसाधन संरक्षण आधारित फार्मर फर्स्ट दृष्टिकोण के माध्यम से खाद्य सुरक्षा, स्थिरता और मृदा स्वास्थ्य सुनिश्चित करना” परियोजना के तहत गोद लिया गया है। यह पहल वर्ष 2017 से भोपाल जिले के गांवों में संचालित थी, जिसे वर्ष 2025 में विदिशा जिले तक विस्तारित किया गया। वर्तमान में यह परियोजना 100 किसानों के खेतों तक पहुंच चुकी है, जिसे वर्ष 2026 में 70 महिलाओं सहित 200 लाभार्थियों तक विस्तारित करने की योजना है।
कार्यक्रम में डॉ. आर.के. सिंह, डॉ. संजय श्रीवास्तव, डॉ. के. भारती, डॉ. आशा साहू, डॉ. शिनोगी केसी एवं डॉ. नारायण लाल ने “कम लागत एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों के माध्यम से टिकाऊ मृदा प्रबंधन” विषय पर मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम में 65 महिला किसानों सहित लगभग 120 किसानों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का समन्वय फार्मर फर्स्ट परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. शिनोगी केसी द्वारा किया गया।
