मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पहली बार रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टॉमी सुविधा शुरू
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पहली बार रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टॉमी सुविधा शुरू
संतोष योगी की खबर 99932 68143
भोपाल,स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में भोपाल स्थित नोबल मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में उन्नत रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टॉमी तकनीक से उपचार सुविधा प्रारंभ की गई है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में अपनी तरह की पहली अत्याधुनिक तकनीक है, जो जटिल रक्त के थक्कों (ब्लड क्लॉट) के इलाज में कारगर साबित होगी।
अस्पताल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चीफ इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अगम्य सक्सेना (MD, EBIR) और डायरेक्टर एवं क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ. सर्वेश मिश्रा (MBBS, MD) ने बताया कि यह प्रणाली फार्माको-मैकेनिकल तकनीक पर आधारित है। इसमें दवा और मैकेनिकल प्रक्रिया के संयोजन से शरीर के प्रभावित हिस्से में बने थक्कों को हटाया जाता है और रक्त प्रवाह को शीघ्र बहाल किया जाता है।
डॉ. सक्सेना ने जानकारी दी कि इस तकनीक के माध्यम से हाथ, पैर, पेट, डायलिसिस फिस्टुला सहित शरीर के विभिन्न अंगों में बने रक्त के थक्कों को बिना बड़ी सर्जरी के हटाया जा सकता है। इस प्रक्रिया में बड़े चीरे की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि एक छोटी सी सुई के माध्यम से धमनी के रास्ते प्रभावित हिस्से तक पहुंचकर थक्का निकाला जाता है। कई मामलों में बिना बेहोशी के भी उपचार संभव है।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि नई स्ट्रोक गाइडलाइन 2026 के अनुसार त्वरित थ्रोम्बेक्टॉमी आधारित उपचार को प्राथमिकता दी जा रही है, क्योंकि समय पर हस्तक्षेप से लकवे की आशंका कम की जा सकती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि अचानक हाथ-पैर में कमजोरी, सूजन, तेज दर्द, त्वचा का रंग बदलना, बोलने में कठिनाई या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नता जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार अब तक 125 से अधिक जटिल थ्रोम्बेक्टॉमी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। पहले यह उपकरण किराए पर उपलब्ध था, जिससे समय निर्धारण में कठिनाई आती थी। अब उपकरण की स्थायी उपलब्धता के बाद यह अस्पताल मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ क्षेत्र का पहला केंद्र बन गया है, जहां यह सुविधा 24×7 उपलब्ध रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुविधा के शुरू होने से प्रदेश के मरीजों को महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी तथा गंभीर मरीजों को त्वरित और बेहतर उपचार मिल सकेगा।
