सुदामा–कृष्ण प्रसंग से गूंजा कथा पंडाल: मित्रता हो तो सुदामा जैसी — पं. सिद्धांत महाराज

संतोष योगी की खबर 99932 68143

भोपाल। इन्द्रपुरी स्थित श्री मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का समापन भक्तिमय वातावरण में हुआ। कथा के अंतिम दिवस पंडित सिद्धांत महाराज ने सुदामा–कृष्ण प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता त्याग, प्रेम और समर्पण पर आधारित होती है—मित्रता हो तो सुदामा जैसी।

महाराज श्री ने बताया कि निर्धन ब्राह्मण सुदामा जब द्वारका पहुंचे तो भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं दौड़कर अपने बालसखा का स्वागत किया। उन्होंने सुदामा के चरण धोकर यह संदेश दिया कि ईश्वर के लिए प्रेम और भाव ही सर्वोपरि हैं। सुदामा द्वारा लाए गए चिवड़े को श्रीकृष्ण ने बड़े स्नेह से ग्रहण किया और बिना मांगे ही अपने मित्र का जीवन धन-धान्य से परिपूर्ण कर दिया। यह प्रसंग सिखाता है कि सच्चा मित्र वही है जो कठिन समय में साथ खड़ा रहे और बिना कहे मन की पीड़ा समझ ले।

कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। भजनों और संकीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया। समापन अवसर पर समिति अध्यक्ष दीपक राजपूत ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगकर्ताओं एवं क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सभी के तन, मन और धन से मिले सहयोग से यह आयोजन सफल हुआ।

कार्यक्रम के अंत में आरती और प्रसाद वितरण के साथ संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का विधिवत समापन हुआ।