होली दहन 2 मार्च को शास्त्र सम्मत, 3 मार्च को रंगोत्सव पर नहीं कोई रोक: प्रहलाद अग्रवाल

संतोष योगी की खबर 99932 68143

जबलपुर /होली दहन की तिथि और रंगोत्सव को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे विवाद के बीच जबलपुर के वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य एवं लाला रामस्वरूप रामनारायण पंचांग के संपादक प्रहलाद अग्रवाल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा है कि 2 मार्च को होलिका दहन पूर्णतः शास्त्र सम्मत है और इसमें किसी प्रकार का विवाद नहीं है।

उन्होंने बताया कि देश के लगभग 99 प्रतिशत पंचांगों में 2 मार्च की रात्रि 1 से 2 बजे के बीच भद्रा पुच्छकाल में होलिका दहन का समय दिया गया है, जो शास्त्रों के अनुसार उचित है। 3 मार्च को होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत नहीं माना गया है।

विवाद की वजह क्या है?

प्रहलाद अग्रवाल के अनुसार, विवाद 3 मार्च को पड़ रहे चंद्रग्रहण को लेकर उत्पन्न हुआ है। कुछ ज्योतिषाचार्यों द्वारा ग्रहण के कारण रंगोत्सव न मनाने की बात कही जा रही है, जबकि शास्त्रों में ऐसा कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता कि चंद्रग्रहण के दिन रंग खेलने पर रोक हो।

उन्होंने बताया कि देश के कई प्रसिद्ध पंचांगों—जबलपुर, बनारस, उज्जैन एवं महाराष्ट्र के पंचांगों—में 3 मार्च को रंग खेलने की तिथि ही प्रकाशित की गई है। इन पंचांगों में कहीं भी चंद्रग्रहण के कारण होली न खेलने का उल्लेख नहीं है। साथ ही, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भी 3 मार्च को होली की सार्वजनिक छुट्टी घोषित है।

सूतक समय को लेकर भ्रम

प्रहलाद अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि चंद्रग्रहण का सूतक ग्रहण “दिखाई देने” के 9 घंटे पूर्व से लगता है। भारत में चंद्रग्रहण शाम लगभग 6 बजे चंद्र उदय के समय दिखाई देगा। ऐसे में उसके 9 घंटे पूर्व, अर्थात सुबह 9 बजे से सूतक प्रभावी माना जाएगा।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग दोपहर 3 बजे ग्रहण लगने के समय से 9 घंटे पूर्व सूतक मान रहे हैं, जो तकनीकी दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है, क्योंकि उस समय भारत में ग्रहण दृश्य नहीं होगा।

सुबह 9 बजे तक बिना दोष होली संभव

स्पष्ट किया गया है कि 3 मार्च को सुबह 9 बजे तक बिना किसी दोष के रंगोत्सव मनाया जा सकता है। इस अवधि में रंग खेलना और खान-पान करना शास्त्र सम्मत है।

अंत में प्रहलाद अग्रवाल ने कहा कि होली उल्लास और उत्साह का पर्व है। जब 2 मार्च को होलिका दहन हो रहा है तो स्वाभाविक रूप से 3 मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा और इसे लेकर किसी प्रकार का भ्रम फैलाने की आवश्यकता नहीं है।