शराब ठेकेदारों का एकाधिपत्य खत्म करने की तैयारी, भोपाल जिले में 87 मदिरा दुकानें अब 20 समूहों में पुनर्गठित

 

संतोष योगी की खबर 99932 68143

 

भोपाल। वर्ष 2025-26 में भोपाल जिले की कुल 87 मदिरा दुकानें 4 बड़े समूहों में संचालित हो रही थीं, लेकिन शासन के निर्देशानुसार अब इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। वर्ष 2026-27 के लिए इन 4 समूहों को समाप्त कर जिले की सभी 87 कम्पोजिट मदिरा दुकानों को 20 अलग-अलग समूहों में पुनर्गठित किया गया है।

इस नई व्यवस्था का उद्देश्य शराब व्यवसाय में लंबे समय से बने बड़े ठेकेदारों के एकाधिपत्य को समाप्त करना और छोटे व नए लाइसेंसियों को भी इस व्यवसाय में भागीदारी का अवसर देना बताया जा रहा है।

हालांकि शासन के इस निर्णय से जिले के मौजूदा बड़े लाइसेंसियों में घबराहट का माहौल देखने को मिल रहा है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान लाइसेंसी अपने एकाधिकार को बनाए रखने के लिए इस वर्ष शराब व्यवसाय में घाटा होने का प्रचार कर रहे हैं, ताकि छोटे और नए लाइसेंसी वर्ष 2026-27 की निविदा प्रक्रिया में भाग लेने से हतोत्साहित हो जाएं।

जानकारों का कहना है कि यदि टेंडर प्रक्रिया में पर्याप्त आवेदन नहीं आते हैं तो शासन को मजबूर होकर फिर से बड़े-बड़े समूह बनाने पड़ सकते हैं, जिससे वर्तमान बड़े ठेकेदारों का एकाधिपत्य फिर से कायम हो सकता है।

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 के अंत तक वर्तमान लाइसेंसियों को भोपाल जिले के प्रत्येक समूह से 50 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा होने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद घाटे का माहौल दिखाकर नए और छोटे ठेकेदारों को डराने की कोशिश की जा रही है।

बताया जा रहा है कि घाटे के इस दुष्प्रचार का मुख्य उद्देश्य यह है कि अन्य जिलों के इच्छुक ठेकेदार भी निविदा प्रक्रिया से दूरी बना लें। ऐसी स्थिति में यदि नए 20 समूहों का निष्पादन नहीं हो पाता है तो शासन को नीति बदलकर फिर से 5 से 6 बड़े समूह बनाना पड़ सकता है, जिससे बड़े लाइसेंसियों को ही फायदा होगा।

फिलहाल शासन की नई नीति से शराब व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और छोटे कारोबारियों को अवसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन टेंडर प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस बदलाव का वास्तविक असर क्या होगा।