योगी आदित्यनाथ की माताजी पर अभद्र टिप्पणी को लेकर संत समाज में रोष, कठोर कार्रवाई की मांग

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हाल ही में मौलाना अब्दुल्ला सलीम द्वारा योगी आदित्यनाथ की माताजी के संबंध में की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर संत समाज और विभिन्न हिंदू संगठनों में तीव्र आक्रोश व्याप्त है। इस विषय पर संत महामंडल और सामाजिक संगठनों ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे भारतीय संस्कृति और सामाजिक मर्यादाओं का घोर अपमान बताया है।

संतों ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति “मातृदेवो भवः” और “वसुधैव कुटुम्बकम्” के महान सिद्धांतों पर आधारित है, जहां हर मां को सर्वोच्च सम्मान और पूजनीय स्थान दिया जाता है। किसी भी व्यक्ति की माता के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की सांस्कृतिक भावना का अपमान है।

राष्ट्रीय गौ रक्षा संघ से जुड़े संत महामंडल प्रमुख डॉ. आशुतोष ब्रह्मचारी ने इस घटना की कठोर शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि इस प्रकार की संकीर्ण और उकसावे वाली मानसिकता समाज में वैमनस्य और अशांति फैलाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक और सभ्य राष्ट्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति मर्यादा की सीमाएं लांघकर किसी की मां या परिवार के सम्मान को ठेस पहुंचाए।

डॉ. आशुतोष ब्रह्मचारी ने सरकार और प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में शांति और सम्मान बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि दोषी व्यक्ति के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की अमर्यादित और भड़काऊ टिप्पणी करने का साहस न कर सके।

संत समाज ने यह भी कहा कि साधु-संतों के साथ-साथ समस्त हिंदू समाज भी इस विषय को गंभीरता से देख रहा है और सामाजिक मर्यादा की रक्षा के लिए एकजुट है। संतों का मानना है कि यदि ऐसे कृत्यों पर समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो इससे समाज में असंतोष और तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है।

अंत में संत समाज ने एक स्वर में कहा कि भारत की संस्कृति में मां का स्थान सर्वोच्च और पूजनीय है। इसलिए किसी भी मां के सम्मान पर आघात करने वाले बयान को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में कठोर कानूनी कार्रवाई कर समाज को स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि भारत में संस्कृति, सम्मान और सामाजिक मर्यादा सर्वोपरि हैं।