श्रीभागवत कथा में ध्रुव और प्रहलाद की कथाओं से जीवन के संदेश

संतोष योगी की खबर 9993268143

भोपाल श्री लक्ष्मीनारायण (बिड़ला) मंदिर में सजावट और व्यासपीठ पर फूलों का श्रृंगार, भक्तों के लिए आसन और प्रसाद वितरण की व्यवस्था, आरती और दीप प्रज्वलित।

वृदावन धाम से पधारे श्रद्धेय श्री नीरज नयनजी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के चतुर्थ स्कंध का सुंदर प्रसंग प्रस्तुत किया। गुरूजी ने बताया कि महाराजा उत्तानपाद की दो पत्नियां थीं – सुनीति और सुरुचि। ध्रुव के अडिग संकल्प और तपस्या की कथा के माध्यम से उन्होंने यह शिक्षा दी कि धर्म और नीति का मार्ग (सुनीति) ही वास्तविक शांति और मोक्ष प्रदान करता है।

गुरूजी ने ध्रुव के संघर्ष और कठिन तपस्या का विवरण दिया। केवल 5 वर्ष की आयु में ध्रुव ने "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करते हुए परमपिता का सानिध्य प्राप्त किया। उन्होंने संकल्प की शक्ति का महत्त्व बताया और कहा कि यदि बालक ध्रुव ईश्वर को पा सका, तो मनुष्य अपनी इच्छाशक्ति से कुछ भी हासिल कर सकता है।

इसके साथ ही प्रहलाद और हिरण्यकश्यप की कथा सुनाई गई, जिससे जीवन के सत्य और परिवर्तनशीलता का संदेश मिला। भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि सृष्टि का विधान मानव बुद्धि से बड़ा है और मृत्यु अटल है।

प्रबंधक श्री के. के. पाण्डेय और नारायण सेवा समिति के श्री अरुण कुमार शर्मा द्वारा व्यासपीठ पूजन किया गया। सत्र का आरती और प्रसाद वितरण के साथ समापन हुआ।