खिरकिया स्वास्थ्य केंद्र बना लापरवाही का अड्डा? नियमों को ठेंगा, मरीजों की जान खतरे में

9 महीनों में तीसरी बार अस्पताल परिसर में पोस्टमार्टम, जिम्मेदार बेपरवाह भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे डॉक्टरों पर फिर सवाल, कार्रवाई अब तक शून्य

भोपाल हेडलाइंस हरदा जिला ब्यूरो संजय योगी की खबर 

खिरकिया/क्या खिरकिया का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अब इलाज का केंद्र कम और लापरवाही का अड्डा ज्यादा बन चुका है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि एक बार फिर अस्पताल परिसर के अंदर ही पोस्टमार्टम किए जाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है।

हैरानी की बात यह है कि यह कोई पहली घटना नहीं, बल्कि पिछले 9 महीनों में तीसरी बार ऐसा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के स्पष्ट नियमों को दरकिनार कर लगातार इस तरह की गतिविधियां होना व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा करता है।

सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस परिसर में प्रसूति वार्ड और नवजात शिशु कक्ष संचालित हैं, उसी जगह पोस्टमार्टम किया जा रहा है। क्या जिम्मेदारों को यह नहीं पता कि इससे संक्रमण फैल सकता है? क्या नवजातों और मरीजों की जान की कोई कीमत नहीं?

इस पूरे मामले में उंगलियां सीधे *डॉ. राम सोनी* की ओर उठ रही हैं। आरोप है कि वे नियमों को नजरअंदाज कर लगातार मनमानी कर रहे हैं। सवाल यह भी है कि जिन पर पहले से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं और जांच में कई बातें सामने आई थीं, उनके खिलाफ अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

इतना ही नहीं, *सीएम हेल्पलाइन* पर शिकायत के बावजूद भी कोई असर नहीं दिखा। इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं न कहीं जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में मौन समर्थन तो नहीं दे रहे?

वहीं, *डॉ. राजेंद्र ओरिया* की भूमिका भी अब सवालों के घेरे में है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि उनकी जानकारी या सहमति के बिना इस तरह की गतिविधियां संभव नहीं हैं।

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। उनका साफ कहना है कि यदि जल्द उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल —

 क्या स्वास्थ्य विभाग इस बार भी आंखें मूंदे रहेगा?

क्या जिम्मेदार डॉक्टरों पर कार्रवाई होगी या फिर मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

यह केवल एक अस्पताल का मामला नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा है।

*जिला स्वास्थ्य अधिकारी एच.पी. सिंह*

मामले की जांच के बाद संबंधित से लिखित रूप में जवाब मांगा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी।