नई कविता पर हुआ साहित्यिक विमर्श, रचनाकारों ने सुनाई प्रभावशाली रचनाएं

तुलसी साहित्य अकादमी द्वारा सृजन श्रृंखला-56 के अंतर्गत “नई कविता” विषय पर साहित्यिक विमर्श एवं कविता पाठ का आयोजन किया गया।

 

 

संतोष योगी की खबर 999 3268 143

 

तुलसी साहित्य अकादमी द्वारा सृजन श्रृंखला - 56 के अंतर्गत नई कविता पर साहित्यिक विमर्श तथा कविता पाठ का आयोजन किया गया।

“तुम क्या समझे तुम क्या जाने तुम तो सुख दुविधा भोगी हो” – डॉक्टर मोहन तिवारी आनंद

“प्यार सिर्फ़ चाँदनी नहीं, धूप का भी राग है” - सुरेश पटवा

“रंग हमारे अंग तुम्हारे जब मिल जाएँ होली है” – शरद व्यास

डा.मोहन तिवारी आनंद ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में नई कविता के साहित्यिक अवदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों की उपादेयता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे विमर्श रचनाकारों के रचना कौशल को निखारने की कार्यशालाएं होते हैं। तुलसी साहित्य अकादमी का इस तरह के आयोजन करने का मूल उद्देश्य ही नये रचनाकारों को प्रशिक्षित करना है। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन डा.शिव कुमार दीवान ने किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा.राजेश तिवारी, सारस्वत अतिथि सुरेश पटवा, एवं विशिष्ट अतिथि कर्नल गिरिजेश सक्सेना और श्री वी.के.श्रीवास्तव रहे। मंचस्थ अतिथियों द्वारा माता सरस्वती का पूजन अर्चन एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। डा.राजेश तिवारी ने सरस्वती वंदना का सस्वर पाठ किया तदुपरांत पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर काव्यपाठ हुआ।

मुख्य अतिथि डा. राजेश श्रीवास्तव ने गोष्ठी में सहभागी रचनाकारों की रचनाओं पर समीक्षात्मक टिप्पणी की। सारस्वत अतिथि सुरेश पटवा में गोष्ठी में हुए विमर्श पर समीक्षात्मक विवेचना करते हुए कहा कि इस तरह के विमर्श ने रचनाकारों को सीखने के अवसर उपलब्ध कराते हैं। विशिष्ट अतिथि वीरेंद्र श्रीवास्तव कहा ने तुलसी साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित सृजन श्रृंखला के अंतर्गत किए जाने वाले साहित्यिक आयोजन उत्कृष्ट श्रेणी के हो रहे हैं तथा शहर के रचनाकारों को उचित अवसर प्राप्त हो रहे हैं। पवन कुमार जैन ने नई कविता पर विचार रखे।

कर्नल गिरिजेश सक्सेना ने “हे पुरुष महिला दिवस अब की बरस”, वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने “रुको थोड़ा ठहर जाओ जल्दबाजी मत करो”, चेतन दीवान ने “नव रात्रि में पड़ रहा गुड़ी पड़वा त्योहार”, कमल किशोर दुबे ने “हृदय का भाव है कविता”, हरि ओम श्रीवास्तव ने “कविता से अच्छा नहीं माध्यम कोई”, कर्नल गिरिजेश सक्सेना ने “हे पुरुष महिला दिवस अंकित बरस”, कमलेश नूर ने “तारे तोड़ लाना चाहता हूँ”, गोपाल देव नीरद “गंगा माँ का पानी है”, शिवराज सिंह ने “अगर ये दुआ है तो सज़ा है”, गोकुल सोनी ने “श्रम की छैनी जब हैं, पत्थर तब टार जाता है”, चरण जीत सिंह कुकरेजा ने “उतना ही क्रय कीजिए जितना दरकार”, डॉक्टर प्रभा मिश्रा ने “मुझसे मौसम हुए नाराज़ किसलिए”, सुंदर लाल प्रजापति ने “किसी भी शोर का उतना असर नहीं होता जितना खामोश निगाहों का होता है”, मनोरमा श्रीवास्तव ने “सत्यम शिवम् सुंदरम” सुषमा श्रीवास्तव ने “नहीं होंगे पेड़ पौधे हरियाली कहाँ से लाओगे”, मनोरमा पंत ने “कितना अजीब है कि स्त्री झेले हुए दर्द की आहट पाती है”, लक्ष्मी नारायण उपेंद्र “भावना से राम साधो राम मिल जाते हैं”, शरद व्यास ने “रंग हमारे अंग तुम्हारे जब मिल जाएँ होली है”, सरोज लता सोनी ने “चैत्र प्रतिपदा से नव संवत् लग जाता है” रचना का पाठ किया।

विनीत

डा.मोहन तिवारी आनंद

राष्ट्रीय अध्यक्ष

तुलसी साहित्य अकादमी

भोपाल मध्य प्रदेश

मोबाइल -9827244327