ईवीएम और मतगणना पर उठे गंभीर सवाल, भोपाल दक्षिण-पश्चिम चुनाव मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन

संतोष योगी की खबर 999 3268 143

भोपाल प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, भोपाल में आज पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा ने एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने भोपाल दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के चुनाव और उससे जुड़ी कथित अनियमितताओं पर विस्तार से जानकारी दी।

इस अवसर पर सज्जन सिंह वर्मा, मुकेश नायक, जेपी धनोपिया, अरुण श्रीवास्तव, शेखर शर्मा, गुड्डू चौहान तथा भूपेंद्र गुप्ता सहित कई वरिष्ठ नेता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

शर्मा ने बताया कि 152-भोपाल दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के चुनाव से संबंधित मामला वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। एसएलपी सिविल (डायरी क्रमांक 45048/2025) में 23 मार्च 2026 को पारित आदेश के तहत न्यायालय ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए नोटिस जारी किए हैं। इस प्रकरण की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद विवेक तंखा द्वारा की जा रही है।

उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 के अंतर्गत 17 नवंबर 2023 को मतदान हुआ था, जिसमें वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रत्याशी थे। 3 दिसंबर 2023 को हुई मतगणना में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी को विजयी घोषित किया गया।

शर्मा ने आरोप लगाया कि बैलेट पेपर से प्राप्त मतों में उन्हें लगभग 25 प्रतिशत अधिक समर्थन मिला, जबकि ईवीएम से प्राप्त परिणाम इसके विपरीत रहे। उनके अनुसार जिन ईवीएम मशीनों में बैटरी स्तर 99 प्रतिशत था, उनमें भाजपा प्रत्याशी को बढ़त मिली, जबकि 60 से 70 प्रतिशत बैटरी स्तर वाली मशीनों में कांग्रेस को बढ़त दिखाई दी।

उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास स्ट्रांग रूम की सीसीटीवी फुटेज मौजूद है, जिसमें ईवीएम मशीनों के साथ कथित छेड़छाड़ के संकेत मिलते हैं। चुनाव के बाद उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मतगणना स्थल की सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य तकनीकी जानकारी मांगी, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे न्यायालय के अधीन मामला बताते हुए उपलब्ध नहीं कराया।

इसके अतिरिक्त, ईवीएम और वीवीपैट मशीनों में प्रयुक्त बैटरियों की तकनीकी जानकारी भी मांगी गई, जिसे संबंधित निर्माता कंपनी ने “अत्यधिक गोपनीय” बताते हुए देने से इनकार कर दिया।

शर्मा ने कहा कि इस प्रकार की गोपनीयता चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा प्रभावित हुई है।

अंत में उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक है। चूंकि मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, उन्हें विश्वास है कि न्यायालय सत्य को सामने लाकर लोकतंत्र की रक्षा करेगा।