वीरांगना झलकारी बाई के बलिदान ने स्वतंत्रता आ़दोलन को दी नई चेतना : विधायक मालिनी गौड़ झलकारी बाई के त्याग व बलिदान को वह सम्मान नहीं मिला जिसकी वह हकदार थी - उमरैया दुल्हाजु जैसे गद्दार आज भी सामाजिक विकास के लिए घातक - महावर

संतोष योगी की खबर 9993268143

इन्दौर। "जमुना की कोख से जन्मी वह गंगा थी, जिसकी वीरता की चमक देखकर स्वयं रानी लक्ष्मीबाई ने उसमें अपना प्रतिबिंब देख नाम दिया झलकारी ऐसी त्याग, तपस्या और अदम्य साहस की प्रतिमूर्ति वीरांगना झलकारी बाई के 168वें बलिदान दिवस पर इंदौर के दशहरा मैदान अन्नपूर्णा रोड़ स्थित 'वीरांगना झलकारी बाई चौराहा' पर एक भव्य भावांजली कार्यक्रम विधायक श्रीमती मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ के मुख्य आतिथ्य एवं कोली समाज के प्रदेश अध्यक्ष महेश उमरैया की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।

अखिल भारतीय वीरांगना झलकारी महासंघ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शहर की गणमान्य हस्तियों ने उस वीरांगना को याद किया, जिसने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि विधायक श्रीमती मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ ने कहा कि झलकारी बाई केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि नारी शक्ति और देशभक्ति का सर्वोच्च उदाहरण हैं। उनके शौर्य के कारण ही झांसी की सेना अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दे पाई थी।

विधायक श्रीमती गौड़ ने कहा कि झलकारी बाई का जीवन हमें सिखाता है, कि राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पण की कोई सीमा नहीं होती। आज की युवा पीढ़ी को उनके बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए। श्रीमती गौड़ ने प्रतिमा की मांग के संदर्भ में कोली/कोरी समाज को आश्वस्त किया कि इन्दौर में झलकारी बाई की प्रतिमा लगना हमारे लिए गर्व होगा, उन्होंने कहा कि महावर नगर के गार्डन में प्रतिमा लगे, इसके लिए मैं हर कदम पर आपके साथ हूं।

 कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कोली समाज के प्रदेश अध्यक्ष महेश उमरैया ने झलकारी बाई के सामाजिक और राष्ट्रीय योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है और समाज हमेशा उनका ऋणी रहेगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन की सिरमोर रही झलकारी को इतिहास के पन्नों में वह सम्मान नहीं मिला, जिसकी वह हकदार थी, इसी लिए हम झलकारी की प्रतिमा इन्दौर सहित प्रदेश के अन्य शहरों में लगवाने का प्रयास कर रहे हैं।

झलकारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश महावर कोली ने कहा कि स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान दुल्हाजु जैसे गद्दारों के कारण ही झलकारी बाई अंग्रजों की गिरफ्त में आ गई थी, आजादी के 7 दशक बाद भी समाज में विध्न संतोषी लोग अवरुद्ध पैदा करने का काम कर रहे हैं, ऐसे लोगों से हमें सतर्क रहना है।

समारोह में अतिथियों ने वीरांगना के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। वक्ताओं ने झलकारी बाई और रानी लक्ष्मीबाई की उस ऐतिहासिक वीरता को याद किया जब झलकारी बाई ने रानी का रूप धरकर अंग्रेजों को भ्रमित किया और रानी को सुरक्षित निकलने का मार्ग दिया।

इस मौके पर सर्वश्री सुन्दरलाल धीमान, कैलाशचंद्र चौधरी, नंदराम मेहर, कमल धीमान, ईश्वरलाल सनोटिया, ओमप्रकाश धीमान, अशोक वर्मा, महादेव वर्मा, सुरेन्द्र वर्मा, देवीशंकर कोटिया, हेमराज वर्मा, हीरालाल वर्मा, सुरेश वर्मा, गंगाराम वर्मा, देवीप्रसाद वर्मा, विजय धामनिया, देवराज वर्मा, डाॅ. ज्ञानेश शाक्य आदि ने विचार रखे। अतिथियों का स्वागत प्रहलाद टाटवाल, चन्द्रशेखर ध्रुवकर, निर्मल मलोरिया, रमेश चिरगैया, गजेंद्र महावर, रामचंद्र भामोरिया, अनिल सुखाड़िया, सुनील अस्टोलिया, मनोज सुखाड़िया, भारत मंदरोनिया, दिपेश वर्मा, नंदा मलोरिया, रवि कर्नल मेहर, रामप्रसाद अस्टोलिया, कमलेश टाटवाल, अजय खंडेलवाल आदि ने किया।

कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय महासचिव दिनेश वर्मा दानिश ने एवं अंत में आभार जिला महामंत्री महेश वर्मा ने माना।