तुलसी साहित्य अकादमी द्वारा पुस्तक लोकार्पण एवं समीक्षात्मक विमर्श तथा कविता पाठ संपन्न 

 

 

संतोष योगी की खबर 9993268143

भोपाल “इस तरह के लोकार्पण और पुस्तक विमर्श आयोजन रचनाकारों को समृद्ध करते हैं।” -डॉक्टर मोहन तिवारी आनंद

“लोक की करुणा से सार्थक सृजन होता है, निज की करुणा तो दुख की अभिव्यक्ति होता है।” -डॉक्टर प्रभु शंकर शुक्ल

“विधा को ठीक से समझ कर लिखें जिससे कोई नई बात निखर कर सामने आए। वही लेखन सार्थक है।” - सुरेश पटवा

भोपाल- तुलसी साहित्य अकादमी द्वारा सृजन श्रृंखला - 57 के अंतर्गत पुस्तक लोकार्पण एवं समीक्षात्मक विमर्श तथा कविता पाठ का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता डा.मोहन तिवारी आनंद, राष्ट्रीय अध्यक्ष, तुलसी साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा.प्रभु शंकर शुक्ल जी, सारस्वत अतिथि -डा.सुरेश पटवा जी एवं विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार श्री कैलाश आदमी रहे। मंचस्थ अतिथियों द्वारा माता सरस्वती का पूजन अर्चन एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। सर्वप्रथम मनुष्य अतिथियों द्वारा डा.शिवकुमार दीवान की कृति सही फैसला लघुकथा संग्रह का लोकार्पण किया गया, डा.दीवान ने लोकार्पित कृति सही फैसला लघुकथा की लघुकथाएं का पाठ किया जिसपर भरपूर सराहनाएं मिलीं।

वरिष्ठ साहित्यकार एवं कुशल समीक्षक श्री वी.के श्रीवास्तव ने “सही फैसला” लघुकथा संग्रह की समीक्षा करते हुए कृति की लघुकथाओं की सराहना करते हुए कहा कि डा.दीवान के द्वारा सृजित लघुकथाएं समय, काल, एवं परिस्थितियों के कैनवास पर उकेरी गईं सटीक लघुकथाएं हैं जो पाठकों को ज्ञानवर्धक एवं रुचिकर लगेंगीं।

इसके उपरांत डा.अमित दीवान की लेख, आलेख एवं टिप्पणियों की कृति “विचार विविधा” का लोकार्पण किया गया। तदुपुरांत डा.अमित दीवान ने लोकार्पित कृति से एक लेख एवं एक आलेख का पाठ किया।

डा.मोहन तिवारी आनंद ने काव्य गोष्ठियों का साहित्यिक अवदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों की उपादेयता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे विमर्श रचनाकारों के रचना कौशल को निखारने की कार्यशालाएं होते हैं। मुख्य अतिथि डा.प्रभु शंकर शुक्ल ने गोष्ठी में सहभागी रचनाकारों की रचनाओं पर समीक्षात्मक टिप्पणी की।

सारस्वत अतिथि सुरेश पटवा ने गोष्ठी में हुए विमर्श पर समीक्षात्मक विवेचना करते हुए कहा कि “विधा को ठीक से समझ इस तरह लिखें जिससे कोई नई बात निखर कर सामने आए। वही लेखन सार्थक है।”

विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार श्री कैलाश आदमी ने कहा “तुलसी साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित सृजन श्रृंखला के अंतर्गत किए जाने वाले साहित्यिक आयोजन उत्कृष्ट श्रेणी के हो रहे हैं तथा शहर के रचनाकारों को उचित अवसर प्राप्त हो रहे हैं।”

द्वितीय सत्र में पहले आओ पहले पाओ के क्रमानुसार रचना पाठ किया गया। कमलेश नॉयर ने “अपनी-अपनी सभी की महफ़िल है”, तालिब भोपाली ने “अभी और जलना है थोड़ा”, अशोक तिवारी अमन ने “वह भी था एक दौर यह भी है एक दौर”, अशोक कुमार धमेनिया ने “, जग पीड़ा का मरहम निष्ठुर जाने कैसा हो”, डॉक्टर विमल कुमार शर्मा ने “ज़िंदगी भी क्या है एक झरना है”, सुंदर लाल प्रजापति ने “पेशे ख़िदमत है एक ग़ज़ल”, हरिओम श्रीवास्तव ने “जाति मज़हब पंथ भाषा में विविधता हो भले”, डॉक्टर राजेश तिवारी ने “लफ्ज़ हैं आपके या हैं सपोले”, शिवराज सिंह चौहान ने “जो आया बसंत सर्दी का हुआ अंत”, कैलाश मेश्राम ने “तुम मेरा मन देखा”, चंदर ने “प्यार तुमने किया”, हंसराज भारती ने “आपके प्यार में वक्त ही नहीं”, प्रदीप ध्रुव भोपाल ने “जब तजुर्बा आदमी का बोलता है”, मंजू पटवा ने “बैंकर की व्यथा कथा”, गोपाल दास नीरद ने “शम्स गुमसुदा है”, चाँद अधमरा”, मनोरमा श्रीवास्तव ने “टूटते तारे का दर्द”, शरद व्यास ने “सुख आगे दुख मेरे पीछे”, रचना का पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन डा.अशोक तिवारी अमन, ने किया। डा.शिवकुमार दीवान महासचिव तुलसी साहित्य अकादमी ने सभी का आभार व्यक्त किया ।