विक्रमादित्य महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा "अनंतलीला" भगवान जगन्नाथ की महिमा का मंचन

 

संतोष योगी की खबर 9993268143

 

भोपाल। विक्रमादित्य ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन के होनहार विद्यार्थियों द्वारा पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक संस्थान के सभागार में "अनंतलीला" भगवान जगन्नाथ के चरित्र का मंचन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री इंदर सिंह परमार जी, माननीय उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं आयुष मंत्री मध्यप्रदेश शासन, विशिष्ट अतिथि प्रो. खेमसिंह डेहरिया जी, अध्यक्ष म.प्र. निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, भोपाल, विशिष्ट अतिथि डॉ. समर बहादुर सिंह जी कुलसचिव बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल, एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री आदित्य नारोलिया जी चैयरमेन विक्रमादित्य ग्रुप ऑफ इंस्टीट्‌यूशन, भोपाल, डायरेक्टर डॉ. दीपिका सिंह नारोलिया की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सभी अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर हुआ। मुख्य अतिथि श्री इंदर सिंह परमार जी ने ऑनलाइन जुड़‌कर विक्रमादित्य परिवार के सभी सदस्यों को "अनंतलीला" कार्यक्रम की शुभकामनायें दी एवं संबोधित करते हुये कहा कि भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पहला राज्य है जिसने नवीन शिक्षा प्रणाली को अपनाया एवं उसमें आज के समय के विद्यार्थियों में समाज के दायित्व, माता-पिता एवं गुरूजनों सम्मान, धार्मिक ग्रंथ, भारत का ऐसा इतिहास जो विद्यार्थियों से अछूता रह गया था इन सभी भारतीय ज्ञान परंपरा को समाहित किया गया है एवं इसे छात्रों तक अलग-अलग माध्यम से पहुंचाने के लिए विक्रमादित्य शैक्षणिक परिवार की सराहना की। कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री आदित्य नारोलिया जी ने सभी को भगवान जगन्नाथ की अनंतलीला कार्यक्रम की शुभकामनायें दी उन्होंने अपनी दूरदर्शिता का परिचय देते हुये आदिवासी अंचल पिपरिया में विक्रमादित्य इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंस की स्थापना की, जिसमें रिसर्व के कार्य किये जायेंगे। उन्होंने संस्थान में संचालित कोर्स की जानकारी साझा करते हुये चताया कि फार्मेसी संस्थान को आदिवासी क्षेत्र में स्थापित करने का मुख्य उ‌द्देश्य चन की जड़ी बूटियों से दवाओं के निर्माण की संभावनाओ पर कार्य करने का बताया। विशिष्ट अतिथि डॉ. समर बहादुर सिंह जी ने सभी विद्यार्थियों को एवं संस्था भारतीय ज्ञान परंपरा की ओर अग्रसर होने एवं इस तरह के तथ्यपूर्ण आयोजन की बधाई दी। विशिष्ट अतिथि प्रो. खेमसिंह डेहरिया जी ने उनके कार्यकाल में हुये शिक्षा के बदलाव की जानकारी दी एवं उनके द्वारा नवीन शिक्षा प्रणाली में भारतीय ज्ञान परंपरा के समाहित होने के कारण का उल्लेख किया। डायरेक्टर डॉ. दीपिका नारोलिया ने अपने उद्‌द्योधन में कहा कि भारत की समृद्ध प्राचीन ज्ञान परंपरा आज भी विश्व कल्याण की आधारशिला है। भारतीय शिक्षा पद्धति ने प्राचीन काल से ही मानवता को दिशा प्रदान की है और आधुनिक युग में भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है। उन्होंने भगवान जगन्नाथ की अनंतलीला के सार की जानकारी दी। विद्यार्थियों के द्वारा भगवान जगन्नाथ की अनंतलीला का मंचन किया जिसमें उन्होंने सभी दशावतार को दिखाया। द्वापर युग के समाप्त होने के समय भगवान श्री कृष्ण का अपने धाम में गमन करना एवं भगवान जगन्नाथ के स्वरूप में प्रकट होने की पूर्ण कवा का मंचन किया गया। भक्ति से ओतप्रोत नाटिका के मंबन के समय भगवान जगन्नाथ के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राध्यापिका डॉ. श्वेता तिवारी के द्वारा लिखित भारतीय ज्ञान परंपरा पुस्तक का विमोचन किया गया। डॉ. श्वेता तिवारी एवं उनकी टीम के माह के अथक प्रयासों से कार्यक्रम सफल हो सका है। महाविद्यालय में पूर्व में अध्ययन कर चुके एवं अध्ययनरत विद्यार्थियों को भी पुरस्कृत किया किया गया जो केन्द्र एवं राज्य सरकार के निकायों में अच्छे पदों पर कार्यरत है। समाज सेवा, खेल से जुड़े विद्यार्थियों का भी सम्मान किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के अभिभावक, शालाओं के प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं महाविद्यालय के समस्त स्टाफ के साथ विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।