अपने हक और अधिकारों के लिए 29 अप्रैल को जुटेंगे अतिथि शिक्षक, उपस्थिति अनिवार्य: के. सी. पवार
अपने हक और अधिकारों के लिए 29 अप्रैल को जुटेंगे अतिथि शिक्षक, उपस्थिति अनिवार्य: के. सी. पवार
संतोष योगी की खबर 9993268143
भोपाल। प्रदेश के अतिथि शिक्षकों के हितों और अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा देने के लिए इस बार एक ऐतिहासिक पहल सामने आई है। पिछले 18 वर्षों में पहली बार अतिथि शिक्षकों के अलग-अलग संगठनों ने अपने मतभेद भुलाकर संयुक्त मोर्चा तैयार किया है। इस संयुक्त मोर्चे के बैनर तले 29 अप्रैल को प्रदेशभर के अतिथि शिक्षक अपनी मांगों को लेकर बड़े आंदोलन में शामिल होंगे।
अब तक अतिथि शिक्षक अलग-अलग संघों के माध्यम से अपनी मांगों के समर्थन में भोपाल में आंदोलन, प्रदर्शन और रैलियां करते रहे हैं, लेकिन इस बार पहली बार सभी संगठन एक मंच, एक मांग और एक परिवार की भावना के साथ एकजुट हुए हैं। संयुक्त मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष के. सी. पवार ने बताया कि जब चारों संगठनों का उद्देश्य एक है और मांगें समान हैं, तो अलग-अलग आंदोलन कर अपनी ताकत कमजोर करना उचित नहीं था। इसी सोच के साथ सभी संगठनों ने अतिथि शिक्षकों के हित में यह बड़ा निर्णय लिया है।
के. सी. पवार ने कहा कि 29 अप्रैल का यह आंदोलन अतिथि शिक्षकों के भविष्य की दिशा तय करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिथि शिक्षकों की प्रमुख मांग सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। साथ ही जो अतिथि शिक्षक किसी भी कारणवश सेवा से बाहर हुए हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से पुनः सेवा में लिया जाए। इसके अतिरिक्त अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी सरकार के समक्ष रखी जाएंगी।
उन्होंने बताया कि संयुक्त मोर्चे का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर अतिथि शिक्षकों की समस्याओं और मांगों को विस्तार से प्रस्तुत करेगा। उनका कहना है कि बीते 18 वर्षों में अतिथि शिक्षकों ने तपस्या, त्याग और संघर्ष किया है, जिसका उचित प्रतिफल अब मिलना चाहिए, ताकि अतिथि शिक्षकों और उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
के. सी. पवार ने प्रदेश के सभी अतिथि शिक्षकों से अपील की कि वे आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और सम्मान की लड़ाई है। साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया कि सभी शिक्षक अपनी मर्यादा बनाए रखें और ऐसा कोई कार्य न करें, जो गुरु की गरिमा के विरुद्ध हो।
उन्होंने कहा कि आंदोलन ऐसा हो जिसमें शक्ति प्रदर्शन भी हो, सरकार तक मजबूती से बात पहुंचे और प्रशासन भी अनुशासन व व्यवस्था की सराहना करे। “यदि आंदोलन हो, तो ऐसा हो कि अतिथि शिक्षकों की एकता और गरिमा की मिसाल बने,” उन्होंने कहा।
