रूस में कुम्हारिया के दूसरे युवक की मौत, यूक्रेन युद्ध में गया था
फतेहाबाद। हरियाणा के गांव कुम्हारिया के लिए एक और बेहद दुखद खबर सामने आई है। बेहतर भविष्य के सपने लेकर रूस गए गांव के दूसरे युवक, विजय पूनिया की भी मौत की पुष्टि हो गई है। करीब 25 दिनों के लंबे इंतजार और अनिश्चितता के बाद यह सूचना मिलने से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। विजय का पार्थिव शरीर दिल्ली पहुंच चुका है और परिजन उसे लेने के लिए वहां गए हैं; दोपहर तक शव के गांव पहुंचने की संभावना है।
एजेंटों की ठगी और युद्ध का शिकार
विजय पूनिया जुलाई 2025 में बिजनेस वीजा पर रूस गया था। वहां नौकरी दिलाने का झांसा देकर एजेंटों ने उसे अपने जाल में फंसाया और जबरन रूसी सेना में भर्ती करा दिया। इसके बाद उसे यूक्रेन के साथ चल रहे भीषण युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया। विजय के साथ गांव का ही एक अन्य युवक अंकित जांगड़ा भी ठगी का शिकार हुआ था, जिसका शव 4 अप्रैल को ही गांव लाया गया था।
"हमें बचा लो" – वह आखिरी संदेश
13 सितंबर 2025 को विजय और अंकित की अपने परिवारों से आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने एक वॉइस मैसेज भेजकर गुहार लगाई थी, "सुबह हमें युद्ध के मैदान में ले जाया जा रहा है, बचा सकते हो तो बचा लो।" उस संदेश के बाद से ही दोनों का परिवार से संपर्क टूट गया था। परिवार लगातार भारत सरकार से उनकी सुरक्षित वापसी की गुहार लगा रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
विजय का परिवार पहले से ही कई संघर्षों से जूझ रहा था:
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अकेला सहारा: विजय के पिता का कुछ वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। अब परिवार में केवल उसकी वृद्ध मां माया और छोटा भाई सुनील बचे हैं।
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कर्ज का बोझ: परिवार ने जमीन और गहने गिरवी रखकर या लोन लेकर विजय को विदेश भेजा था, ताकि घर की आर्थिक स्थिति सुधर सके।
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डीएनए जांच: विजय की पहचान सुनिश्चित करने के लिए करीब दो माह पहले उसका डीएनए सैंपल मंगवाया गया था, जिसके बाद अब उसकी मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई है।
विदेश जाने का घटनाक्रम
विजय पहली बार जुलाई 2024 में स्टडी वीजा पर रूस गया था, लेकिन वीजा न बढ़ने के कारण वापस आ गया। फिर अक्टूबर 2024 में गया और मार्च में वापस लौटा। अंततः 15 जुलाई 2025 को वह एक साल के बिजनेस वीजा पर दोबारा रूस गया, जो उसके जीवन का आखिरी सफर साबित हुआ।
