कोलकाता: मई 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद देश के तीन प्रमुख राज्यों—केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु—की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। जहां केरल में कांग्रेस नीत यूडीएफ (UDF) ने दस साल बाद सत्ता में वापसी की है, वहीं पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी 'टीवीके' (TVK) एक नई और बड़ी शक्ति के रूप में उभरी है। इन ऐतिहासिक घटनाक्रमों के बीच नेताओं के बयानों और कदमों ने नई सियासी चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

केरल: सादगी के साथ विदा हुए पिनाराई विजयन

केरल में एलडीएफ (LDF) की करारी हार के बाद पिनाराई विजयन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। कन्नूर से तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर उतरने के बाद विजयन ने एक ऐसा कदम उठाया जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। उन्होंने हवाई अड्डे पर तैनात सरकारी गाड़ी का उपयोग करने से इनकार कर दिया। अपनी सादगी का परिचय देते हुए वे अपनी पार्टी सीपीआई (एम) द्वारा भेजी गई निजी कार में बैठकर रवाना हुए। राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए उन्हें नई सरकार के गठन तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में पद पर बने रहने का अनुरोध किया है।

पश्चिम बंगाल: 9 मई को भाजपा सरकार का राज्याभिषेक

पश्चिम बंगाल के चुनावी दंगल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को हराकर भाजपा ने 206 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने आधिकारिक घोषणा की है कि राज्य के नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को आयोजित किया जाएगा। हालांकि मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है, लेकिन शुभेंदु अधिकारी, समिक भट्टाचार्य और दिलीप घोष जैसे नाम रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं। इस बड़ी जीत के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने दिल्ली के प्रसिद्ध सीआर पार्क काली बाड़ी मंदिर में माथा टेका और इसे 'मां काली का आशीर्वाद' बताया।

तमिलनाडु: विजय की टीवीके और गठबंधन की पहेली

तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके ने 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर सबको चौंका दिया है। इस नई स्थिति ने पुराने गठबंधनों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। वीसीके (VCK) प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने फिलहाल टीवीके को समर्थन देने पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे द्रमुक (DMK) प्रमुख एमके स्टालिन से मुलाकात के बाद ही कोई फैसला लेंगे। दूसरी ओर, माकपा (CPIM) ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि विजय को पहले अपनी राजनीतिक विचारधारा स्पष्ट करनी चाहिए। माकपा सचिव पी. षणमुगम ने दोहराया कि उनकी पार्टी अभी भी मजबूती से द्रमुक गठबंधन के साथ है।