भारतीय रेलवे की प्रमुख सेमी-हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस और अन्य प्रीमियम ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों के खानपान का अनुभव जल्द ही बदलने वाला है। यात्रियों को स्वच्छ, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अब राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड) सीधे भोजन आपूर्ति की कमान संभालने जा रहा है। इस योजना के तहत नैफेड द्वारा विशेष रूप से हाईटेक क्लाउड किचन स्थापित किए जा रहे हैं, जहां से ट्रेनों में ताजा भोजन भेजा जाएगा।

बोर्ड से मिली औपचारिक मंजूरी, जमीनी स्तर पर काम शुरू

नैफेड की हालिया बोर्ड बैठक में इस रणनीतिक विस्तार को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। संस्था ने इस दिशा में धरातल पर काम भी तेज कर दिया है। योजना के अनुसार, आगामी वर्ष की शुरुआत से कई वंदे भारत ट्रेनों में यात्रियों को परोसा जाने वाला भोजन सीधे नैफेड द्वारा तैयार और वितरित किया जाएगा। नैफेड के प्रबंध निदेशक दीपक कुमार के अनुसार, बोर्ड की मंजूरी मिलते ही संस्था ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर पूर्ण क्षमता के साथ काम शुरू कर दिया है।

आईआरसीटीसी के 16 लाख मील्स के विशाल बाजार में सीधी भागीदारी

वर्तमान समय में प्रीमियम, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को मिलाकर प्रतिदिन करीब 16 लाख भोजन के पैकेटों की आपूर्ति की जाती है। इस विशाल खानपान बाजार में अब नैफेड ने भी सीधी दस्तक दे दी है। ट्रेनों के प्रस्थान और ठहराव समय के अनुसार गुणवत्तायुक्त भोजन की त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक स्थानों पर अत्याधुनिक क्लाउड किचन विकसित किए जा रहे हैं।

अरबों डॉलर के निवेश के बावजूद अर्थव्यवस्था पर डाटा सेंटर्स का असर रहेगा सीमित: मूडीज

नई दिल्ली। देश के डाटा सेंटर उद्योग में हो रहे भारी-भरकम पूंजी निवेश के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका कुल प्रभाव सीमित रहने का अनुमान है। एक ताजा विश्लेषण के अनुसार, डाटा सेंटर क्षेत्र का पूंजीगत व्यय वर्ष 2025 में देश की सांकेतिक (नॉमिनल) जीडीपी का लगभग 0.10 प्रतिशत ही रहा।

2030 तक जीडीपी में महज 0.13 फीसदी हिस्सेदारी का अनुमान

विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2030 तक इन डाटा सेंटर परियोजनाओं के पूरी तरह संचालित हो जाने के बाद भी देश की कुल जीडीपी में इनका प्रत्यक्ष योगदान करीब 0.13 प्रतिशत के सीमित स्तर पर रहने की संभावना है। पूंजी-गहन प्रकृति और भारी आयात निर्भरता के चलते इस क्षेत्र का कुल राष्ट्रीय विकास दर पर प्रभाव सीमित आंका गया है।