दिल्ली की सड़कों पर ड्रोन की निगरानी, जाम दिखते ही तुरंत होगी कार्रवाई
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वाहन चालकों को आए दिन लगने वाले भीषण जाम से राहत दिलाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने आधुनिक ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस तकनीक के जरिए पुलिस ट्रैफिक जाम की ट्रेल (पूरा सिरा) देख सकेगी, जिससे यह सटीक जानकारी मिलेगी कि जाम की शुरुआत कहां से हुई, उसकी लंबाई कितनी है और वाहन किस दिशा में फंसे हुए हैं।
सभी पांचों रेंजों में ड्रोन तैनात, 24 घंटे रखी जाएगी नजर
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की सेंट्रल रेंज के पुलिस उपायुक्त के. रमेश ने बताया कि राजधानी की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए यह पहल की जा रही है:
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प्रत्येक रेंज को मिला ड्रोन: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की सभी पांचों रेंजों—सदर्न रेंज, नई दिल्ली रेंज, सेंट्रल रेंज, उत्तरी रेंज और पश्चिमी रेंज—में एक-एक ड्रोन उपलब्ध कराया गया है।
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24 घंटे निगरानी: ये ड्रोन लगातार उड़कर वास्तविक समय (रियल-टाइम) का डेटा कंट्रोल रूम को भेजते हैं। केवल बैटरी बदलने के समय ही इन्हें नीचे उतारा जाता है।
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त्वरित कार्रवाई: जैसे ही किसी मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार दिखती है, संबंधित सर्किल के ट्रैफिक इंस्पेक्टर को तुरंत सूचित किया जाता है। जाम की स्थिति के आधार पर उस मार्ग के ट्रैफिक सिग्नल के 'ग्रीन टाइम' को बढ़ा दिया जाता है।
ट्रायल में मिली सफलता, सम्मेलनों और रैलियों में हो रहा प्रयोग
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल ट्रायल के तौर पर किया जा रहा है, जिससे लंबे जाम को खत्म करने में बड़ी सफलता हासिल हुई है।
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वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्जन: जाम की आशंका वाले क्षेत्रों की समय रहते पहचान कर वाहनों को तुरंत वैकल्पिक रास्तों पर मोड़ दिया जाता है।
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वीआईपी व बड़े कार्यक्रमों में इस्तेमाल: इस तकनीक का उपयोग धरना, प्रदर्शन, रैलियों और ब्रिक्स सम्मेलन जैसे बड़े आयोजनों के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक प्रबंधन के लिए प्रमुखता से किया जा रहा है।
