शक्ति की भक्ति में डूबेगी दीन-दुनिया

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भोपाल। १९ मार्च 2026 से प्रारंभ होगी प्रतिपदा तिथि। क्षय होने के कारण इस बार अमावस्यायुक्त प्रतिपदा गुरुवार से कलश स्थापना सिद्धि संकल्प प्रारंभ होंगे। माता का आगमन पालकी में होगा। सूर्योदय के साथ ही घटस्थापना के मुहूर्त शुरु हो जाएंगे। दोपहर 12 बजे अभिजीतकाल के अतिरिक्त सायंकाल में प्रदोषकाल सिद्धि साधना की शुरुआत हेतु उत्तम माने गए हैं। ज्योतिष मठ संस्थान के संचालक पं. विनोद गौतम ने बताया कि इस वर्ष पूरे नौ दिन की नवरात्रि भक्तों को पूर्ण फल प्रदान करेगी। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र मीन राशि पर चंद्रमा की उपस्थिति में माता का आगमन होगा तथा चैत्र शुक्ल नवमी पुष्य नक्षत्र, कर्क राशि के चंद्रमा में आदि शक्ति का गमन होगा। इस नौ दिनों अनेक प्रकार से माताजी के नौ रूपों की पूजा की जाती है।

नौ दिन नवरात्र कहलाते हैं, जिसमें मां दुर्गा की पूजा, अर्चना का विधान है। वर्ष में चार नवरात्रों में दो प्रकट एवं दो नवरात्रि के होते हैं। प्रकट नवरात्रि की ९ देवियां इस प्रकार हैं-

शैलपुत्री- पर्वतराज हिमालय की पुत्री, जीवन में नई उम्मीद और मासूमियत का प्रतीक

ब्रह्मचारिणी: ज्ञान, शिक्षा और आत्म-संयम की देवी, तपस्या और अनुशासन का प्रतीक

चंद्रघंटा: साहस और वीरता की देवी, शत्रु नाश और विजय की प्रतीक

कूष्मांडा: सृष्टि की रचना करने वाली आदिशक्ति, क्रिएटिविटी और सकारात्मक सोच का प्रतीक

स्कंदमाता: भगवान कार्तिकेय की माता, मातृत्व और वात्सल्य का प्रतीक

कात्यायनी: शत्रु नाश और विजय की देवी, महिला सशक्तिकरण और न्यायपूर्ण समाज की प्रेरणा

कालरात्रि: अंधकार का नाश करने वाली देवी, सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक

महागौरी: पवित्रता और शांति की देवी, स्वच्छता, समानता और मानसिक शांति का प्रतीक

सिद्धिदात्री: सभी सिद्धियों और शक्तियों की दात्री, आध्यात्मिकता और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है।

इन नौ देवियों की पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि, शक्ति और शांति की प्राप्ति होती है। नवरात्रि का पर्व आत्म-संयम, सामाजिक जागरूकता और परिवर्तन का अवसर है।

घट स्थापना के नियम

ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम के अनुसार घट स्थापना के धर्म शाीय विधान इस प्रकार हैं - १. नवरात्र प्रतिपदा सम्मुखी शुभ होती है। २. जिस दिन अमावस्या के बाद प्रतिपदा हो अत: उस दिन प्रतिपदा अमावस्या युक्ता होने से देवी पूजन प्रारंभ नहीं करना चाहिए। ३. सूर्योदय से दश घटी (चार घंटा) तक प्रात:काल में घट स्थापना शुभ होती है। ४. यदि प्रात:काल में चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग हो तो उस समय घट स्थापना न करें। यदि उस दिन चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग रात्रि तक रहे तो अभिजित मुहूर्त में स्थापन करें। ५. देवी का आवाहन, प्रवेशन, नित्य पूजन और विसर्जन ये सब प्रात:काल में करना चाहिए। ६. यदि प्रतिपदा तिथि क्षय हो तो अमावस्या युक्ता प्रतिपदा को ही घट स्थापना करना चाहिए। ७. यदि प्रथमा तिथि वृद्धि हो तो प्रथम दिन घट स्थापन करना चाहिए। 

 

भवदीय

(पं. विनोद गौतम) 

संचालक

ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल

मो. 9827322068